कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं. एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान जारी किए गए आंकड़ों में भारी अंतर दिखाई दिया, जिसे लेकर अब वे ‘जनमत निर्माण’ अभियान चला रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि जब जनता सवाल पूछना शुरू कर देती है, तो हर सरकार पर दबाव बढ़ जाता है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि चुनावों में गड़बड़ी के कई उदाहरण सामने आए हैं. राहुल ने बताया कि एक महिला ने 22 बार वोट डाला. यह सिर्फ एक उदाहरण है कि आखिर चुनावी व्यवस्था में क्या चल रहा है.
मतदान प्रतिशत को लेकर हुड्डा ने उठाए गंभीर आरोप
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि हरियाणा में वोटिंग 5 नवंबर को हुई थी. उसी रात चुनाव आयोग ने 61.09% मतदान प्रतिशत घोषित किया. अगले दिन, यानी 6 नवंबर को आयोग ने इसे बढ़ाकर 65.65% कर दिया, लेकिन अंतिम आंकड़ा पहुंच गया 67.90% पर. हुड्डा ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ये 7% वोट बढ़े कैसे? यह बढ़ोतरी कब हुई, कैसे हुई? चुनाव आयोग अभी तक इसका जवाब नहीं दे पाया है. कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि यह सिर्फ गणना की गलती नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी न होने का परिणाम है. इसी वजह से वे लगातार जनता के बीच जाकर माहौल बना रहे हैं ताकि चुनाव आयोग इस पर स्पष्ट जवाब दे.
कांग्रेस का एक बड़ा मुद्दा है SIR प्रोजेक्ट- हुड्डा
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस का एक बड़ा मुद्दा SIR प्रोजेक्ट है, जिसे लेकर राज्यभर में विरोध बढ़ रहा है. किसानों, स्थानीय निवासियों और कई सामाजिक संगठनों ने इस परियोजना पर कई सवाल उठाए हैं. हुड्डा ने कहा कि सरकार को इसके प्रभाव और पारदर्शिता पर स्पष्ट होना चाहिए. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की मूलभूत विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अब समय है कि देश फिर से बैलट पेपर वोटिंग की ओर लौटे. ईवीएम पर जनता का भरोसा दिन-ब-दिन कम हो रहा है. जब वोटिंग की गिनती में इतना अंतर दिख रहा है, तो विश्वास कैसे बनेगा? बैलेट पेपर ही पारदर्शिता की असली गारंटी है.
चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर जवाब मांगे जनता
कांग्रेस नेता ने जनता से अपील की कि वे इस मुद्दे को लेकर जागरूक रहें और चुनाव आयोग से जवाब मांगते रहें. उनके अनुसार, जब जनता अपनी आवाज बुलंद करती है, तब लोकतंत्र मजबूत होता है और संस्थाएं जवाबदेह बनती हैं. हरियाणा की राजनीति में यह मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में चुनाव आयोग पर दबाव और बढ़ने की संभावना है.