ग्राम पंचायतों में फ्री में करें चाय-नाश्ता, ये राज्य सरकार खर्च करेगी 4000 रुपए; खुश हो गए ग्रामीण!

हरियाणा सरकार ने ग्रामीण प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है. अब राज्य की सभी ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम सभा बैठकों में चाय और नाश्ते पर 4,000 रुपए तक खर्च कर सकेंगी. पहले यह सीमा 2,000 रुपए थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है. विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश (स्मरण पत्र संख्या GA-I/2025/53459-62, दिनांक 17 अक्टूबर 2025) के अनुसार, यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह व्यय हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 44 और हरियाणा पंचायती राज वित्त, बजट, लेखा, लेखा परीक्षा, कर एवं कार्य नियम, 1996 के नियम 14 के तहत वैध होगा. ग्राम पंचायतें इन पैसों का उपयोग केवल ग्राम सभा बैठकों के दौरान ही कर सकेंगी और खर्च का पूरा विवरण लेखा पुस्तिका में दर्ज करना अनिवार्य होगा.

6,200 ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ
राज्य में लगभग 6,200 ग्राम पंचायतें हैं. इस नई व्यवस्था से इन सभी को सीधा पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा. पहले सीमित बजट के कारण कई पंचायतें सभाओं में ग्रामीणों या मेहमानों के लिए नाश्ते की व्यवस्था नहीं कर पाती थीं. अब बढ़ी हुई राशि से ग्रामीणों की भागीदारी और संवाद में वृद्धि की उम्मीद है.

सरकार ने क्या कहा?
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य ग्राम सभाओं को अधिक सहभागी और जीवंत बनाना है. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, ग्राम सभा स्थानीय स्वशासन की नींव है. अगर माहौल सहज और सहभागी होगा, तो निर्णय अधिक प्रभावी बनेंगे. 4,000 रुपए की सीमा से पंचायतें अब बिना वित्तीय दबाव के आतिथ्य व्यय कर सकेंगी, जिससे पारदर्शिता और सहभागिता दोनों बढ़ेंगी.

अधिकारियों को दिया गया आदेश
राज्य सरकार ने सभी उपायुक्तों, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों तथा खंड विकास अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे इस निर्णय की जानकारी तुरंत अपने-अपने क्षेत्र की पंचायतों तक पहुंचाएं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि खर्च सीमा से अधिक व्यय नहीं होना चाहिए. राशि ग्राम पंचायत फंड से ही ली जाएगी और केवल ग्राम सभा बैठकों के लिए उपयोग की जा सकेगी.

हरियाणा सरकार का यह कदम प्रशासनिक रूप से भले छोटा लगे, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसका बड़ा असर होगा. ‘चाय पर चर्चा’ की यह पहल न केवल ग्राम सभाओं में सहभागिता बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण स्वराज और सहभागी लोकतंत्र की भावना को भी मजबूत करेगी.