हरियाणा में फरवरी में मार्च सा अहसास, सीजन में पहली बार 25 डिग्री के पार हुआ तापमान; गेहूं की फसल पर संकट

करनाल। फरवरी के पहले पखवाड़े के अंतिम दिन सूर्य देव के बढ़े तेज ने किसानों के माथे पर पसीना ला दिया। अक्सर ऐसा मौसम मार्च के महीने में देखने को मिलता है, लेकिन 15 फरवरी को सीजन में पहली बार दिन का तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 9.8 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया है। औसत तापमान की बात की जाए तो गेहूं की फसल के लिए 17.0 डिग्री तक अनुकूल माना जाता है, लेकिन अब यह लाइन भी क्रास हो गई है। यदि मौसम में स्थितरता बनी रहती है या फिर तापमान में बढ़ोतरी होती है तो निश्चित तौर किसानों व विज्ञानियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

हालांकि, एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह भी कहता है कि एक या दो दिन के बढ़े तापमान से ज्यादा असर नहीं होगा, यदि यह सप्ताहभर या इससे अधिक ठरहता है तो विशलेषण करना अनिवार्य हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो यह न केवल जनजीवन बल्कि रबी फसलों, खासकर गेहूं की ग्रोथ पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। गेहूं की बढ़वार पर पड़ सकता है असर फरवरी माह में औसत तापमान 17.0 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना गेहूं की फसल के लिए अनुकूल माना जाता है। इससे अधिक तापमान होने पर फसल की बढ़वार तेज तो होती है, लेकिन दानों का भराव प्रभावित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मार्च से पहले ही गर्मी बढ़ती रही तो दाना पतला रह जाने और उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ जाएगी। वर्तमान समय में गेहूं की फसल दूधिया अवस्था की ओर बढ़ रही है, ऐसे में हल्की ठंड और नियंत्रित तापमान की आवश्यकता होती है।

किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें करनाल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने मौसम के बदले मिजाज को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि फरवरी में ही दिन का तापमान 25 डिग्री से ऊपर जा रहा है, तो मार्च-अप्रैल में स्थिति और गंभीर हो सकती है। कुछ किसानों ने सिंचाई का अंतराल घटाने और खेतों में नमी बनाए रखने की रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। जनजीवन पर भी असर मौसम में आई गर्माहट का असर आम लोगों पर भी दिखने लगा है। दिन में धूप तेज महसूस हो रही है और हल्के ऊनी कपड़ों की जगह अब लोग सूती वस्त्रों की ओर लौट रहे हैं। बाजारों में भी दोपहर के समय भीड़ कम होने लगी है। सुबह-शाम की ठंडक अब पहले जैसी नहीं रही, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। आगे क्या कहते हैं संकेत मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता कमजोर रहने से फिलहाल ठंड लौटने की संभावना कम है। यदि बादलों की आवाजाही या हल्की बारिश नहीं हुई तो तापमान में और वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान समय-समय पर फसल का निरीक्षण करें, आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें और कृषि विभाग द्वारा जारी परामर्श का पालन करें। बदलते मौसम के इस रुख ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जलवायु में आ रहे बदलाव अब सीधे खेती और आम जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले दिनों में तापमान की चाल पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।