अमेरिका पर ईरान का सबसे बड़ा पलटवार, बहरीन समेत कई US ठिकानों को उड़ाया, मिडिल ईस्ट में त्राहिमाम

अमेरिका की ओर से बुधवार को किए गए लगातार दो बड़े हवाई हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दावा किया है कि उसने गुरुवार को बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया. तेहरान का कहना है कि इस कार्रवाई में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं.

बुधवार को अमेरिका द्वारा लगातार दो बड़े हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान ने गुरुवार को जवाबी कार्रवाई का दावा किया है. तेहरान का कहना है कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए अब तक का सबसे बड़ा हमला अंजाम दिया. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. उनका दावा है कि हमले का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को सीधे निशाना बनाना था. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.

कई शहरों में धमाकों से दहला ईरान, अस्पताल भी आया चपेट में
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के किश्म द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक, चाबहार, कोनारक, रास्क, खोनदाब और खोर्रमाबाद समेत कई इलाकों में जोरदार विस्फोट हुए. इसके अलावा अहवाज़ शहर में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं. ईरानी मीडिया का कहना है कि अमेरिकी बमबारी में शाहिद बघाई अस्पताल भी प्रभावित हुआ. अस्पताल के बाल कैंसर उपचार विभाग को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद कीमोथेरेपी करा रहे बच्चों समेत कई मरीजों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा.

सेना की बैरक पर हमला, दर्जनों मौतें और सैकड़ों घायल
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमले में सेना की एक बैरक भी निशाना बनी, जिसमें कम से कम सात सैनिकों की मौत हुई. पूरे देश में अब तक अमेरिकी हमलों में 35 लोगों के मारे जाने और 300 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया है. राजधानी तेहरान में संभावित नए हमलों की आशंका के बीच एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए. वहीं बुशेहर स्थित ईरान के एकमात्र नागरिक परमाणु संयंत्र के आसपास भी नए हमलों की खबरें सामने आई हैं.

अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि कार्रवाई का मकसद उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाना था, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को खतरा पैदा हो रहा था. अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे कुराकाओ ध्वज वाले तेल टैंकर M/T Belma को रोक दिया. हेलफायर मिसाइलों से जहाज के स्मोकस्टैक को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वह ईरान की ओर आगे नहीं बढ़ सका.

ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट को निशाना बनाया. इस दौरान बहरीन में एयर सायरन बजाए गए और कई हमलों को रोकने की बात कही गई. जॉर्डन की सेना ने भी दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया. IRGC ने यह भी कहा कि उसने दक्षिण-पश्चिमी शहर अंदीमेश्क के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया. उधर इराक के एरबिल में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने विस्फोटकों से लैस आठ ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया. अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

कतर, कुवैत और बहरीन के ठिकानों को भी बनाया निशाना
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, जवाबी अभियान केवल बहरीन तक सीमित नहीं रहा. दावा किया गया है कि कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी एक साथ मिसाइल और ड्रोन दागे गए. हमलों के बाद कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनाई देने और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबरें सामने आई हैं.

हथियारों के गोदाम और तेल भंडार को नुकसान पहुंचने का दावा
ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसके हमलों में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस सहित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मौजूद हथियारों के गोदाम और ईंधन भंडारण सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. तेहरान का कहना है कि कई स्थानों पर आग लग गई, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है.

पूरे क्षेत्र पर मंडरा रहा बड़े संघर्ष का खतरा
ईरान की इस जवाबी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं. सैन्य गतिविधियां तेज होने के साथ ही यह आशंका भी बढ़ गई है कि यदि दोनों पक्ष पीछे नहीं हटे तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है. दुनिया की नजर अब अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कूटनीतिक कोशिशों पर टिकी हुई है.