आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉडः हरियाणा सरकार के खाते में वापस आए 590 करोड़ रुपये, फर्जीवाड़े पर केस दर्ज

चंडीगढ़. हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये के फर्जीवाडे में अब केस दर्ज कर लिया गया है. वहीं, फर्जीवाड़े के बाद अब आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार के खातों में यह राशि जमा कर दी गई है. सीएम नायब सिंह सैनी ने यह जानकारी दी है. सीएम नायब सिंह सैनी ने बताया कि पूरे पैसे की रिकवरी 24 घण्टे में कर ली गई है. बैंक की एक शाखा के मिडल और लोवर कर्मचारी इस मामले शामिल थे. वहीं, अगर हमारा कोई अधिकारी भी शामिल होगा, तो उसे बक्शा नहीं जाएगा. सीएम ने कहा कि 556 करोड़ रुपये और साथ ही 22 करोड़ रुपये ब्याज के थे. जो सरकार को लौटा दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने इस विधानसभा के बजट सत्र में कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के लेनदेन में मिली अनियमितताओं के सम्बंध में एफआईआर दर्ज हो गई है. बैंक ने इस सम्बंध में 21 फरवरी को पत्र लिखा था, जबकि जैसे ही यह मामला राज्य सरकार के संज्ञान में आया तो सरकार ने पहले ही 18 फरवरी को बैंक को डि-एमपैनल करते हुए ब्याज सहित पैसा राष्ट्रीय बैंक में ट्रांसफर करने के लिए कह दिया था. पैसा पूरा सुरक्षित है. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पास हरियाणा सरकार की जो धनराशि जमा थी, उसका एक बड़ा भाग सावधि जमा यानी कि एफडी के रूप में जमा था. सीएम ने कहा कि कांग्रेस के समय में भी विभागों का पैसा बैंकों में रहता था. बैंकों के पैनल बनते रहते है, और नए बैंक जुड़ते रहते है. इस मामले की गहनता से जांच की जाएगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

सीएम ने बताया कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी बनाई गई है और यह इस मामले कि जांच करेगी और ये भी सुनिश्चित करेगी कि ऐसा दोबारा ना हो. सीएम ने कहा कि आज हरियाणा की शासन प्रणाली बदली हुई है और अब वो दौर नहीं है कि जब घोटालों को भी दबा दिया जाता था. गौरतलब है कि इस मामले में एंटी करप्शन एक्ट के तहत सेक्शन 13 (2), 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है. हरियाणा सरकार ने मामले की जांच विजिलेंस और एसीबी को सौंपी है.

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कैसे हुआ ये सारा घोटाला
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार के पंचायत विभाग के पैसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा थे. इस पैसे को एफडी के रूप में जमा करवाया गया था. पंचकूला और कालका से जुड़ा यह मामला है. चंडीगढ़ की सेक्टर 32 की शाखा में गड़बड़ी की गई. जब सरकार के खाते में जमा पैसे में अंतर पाया गया तो फर्जीवाड़े का पता चला. क्योंकि एफडी जमा नहीं की गई थी, बल्कि पैसे को शेयर मार्केट में लगाया गया था. बाद में जब ब्याज दिया गया तो यह राशि कम मिली.