हिसार। प्रदेश में शनिवार रात सक्रिय हुए कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का असर लगभग सभी जिलों में देखने को मिला। शनिवार रात से कई जिलों में वर्षा और ओलावृष्टि हुई। जिससे कई स्थानों पर गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। वहीं रात के तापमान में भी एक से दो डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है।
प्रदेश के सभी जिलों में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। महेंद्रगढ़ में सबसे कम न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। वहीं हिसार, अंबाला, रोहतक और चरखी दादरी में न्यूनतम तापमान करीब 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। सुबह के समय ठंडी हवाएं चलने से लोगों को हल्की ठंडक का अहसास हुआ। हालांकि अधिकतम तापमान अभी भी 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में धूल भरी आंधी, गरज-चमक के साथ वर्षा और ओलावृष्टि हुई। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। इसका असर रोहतक, चरखी दादरी, भिवानी, अंबाला, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, झज्जर, करनाल और सोनीपत सहित कई जिलों में देखने को मिला।
तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत मिली है और मौसम सुहावना बना हुआ है। 16 मार्च को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी के आसार हैं।
रोहतक में सबसे अधिक वर्षा
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा रोहतक में 7.2 एमएम दर्ज की गई। इसके अलावा चरखी दादरी में 7 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई। वहीं सिरसा में 5.5 एमएम, पानीपत में 4 एमएम, सोनीपत में 3.5 एमएम और करनाल में 1.5 एमएम वर्षा दर्ज की गई।
18 मार्च की रात सक्रिय होगा एक और पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विज्ञानियों के अनुसार 18 मार्च की रात एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे प्रदेश में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 मार्च तक मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा। इसके बाद 24 और 28 मार्च को भी दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे प्रदेश में फिर से हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे गेहूं की फसल का विशेष ध्यान रखें। खेतों में कटाई के बाद रखी गई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें, क्योंकि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है।