बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी, सीजेआई के समक्ष बोले सीएम सुक्खू

हिमाचल प्रदेश में जन्मी बेटियों को पैतृक संपति में बराबर का हक दिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह बात भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष कही। सीएम ने कहा कि राज्य में लड़कियों को बराबरी का हक पैतृक संपति में भी दिया गया है। हिमाचल पहला राज्य बन गया है, जहां लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल की गईहै। यहां पर कानूनी प्रावधान कर बेटियों की शादी की आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है, जिससे उन्हें लडक़ों के समान अधिकार और अवसर मिल सकें। बेटियों को समान अधिकार देते हुए सरकार ने 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी बराबर का अधिकार प्रदान किया है। पहले यह अधिकार केवल बेटों तक सीमित था। मुख्यमंत्री ने सीजेआई सूर्यकांत का हिमाचल प्रदेश आने पर स्वागत किया और उन्हें दोबारा प्रदेश में आने का न्योता भी दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक न्याय और अपने अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हम संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों और लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत हों। प्रदेश सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है। विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही है। सीएम ने बताया कि राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है, जो कई वर्षों से लंबित पड़े थे। लोगों को घर द्वार पर न्याय पहुंचाने का प्रयास किया है।