हिमाचल: हड़ताल के बीच एंबुलेंस कर्मचारी ने की आत्मदाह की कोशिश, शरीर पर छिड़क लिया तेल

मंडी। हिमाचल प्रदेश में मांगों के समर्थन में हड़ताल पर चल रहे एंबुलेंस कर्मचारियों ने शनिवार को मंडी में प्रदर्शन किया, इस दौरान एक कर्मी ने खुद को आग लगाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने उसे धक्का देकर हटा दिया, अन्यथा वह झुलस सकता था।

कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय मंडी में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और शहर में शव यात्रा निकाली। कंपनी प्रबंधन का पुतला जलाया गया, इस दौरान एक कर्मचारी आग में कूदने लग पड़ा।

25 दिसंबर से चली हड़ताल के तहत शनिवार रात 12 बजे तक दो दिन की हड़ताल के आह्वान पर आज मंडी जिला के एम्बुलेंस कर्मचारी ने पूर्ण हड़ताल पर हैं। मंडी में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व यूनियन के ज़िला प्रधान सुमित कपूर महासचिव पंकज कुमार, संतोष कुमारी, ममता शर्मा, रजनी, तिलक राज, योगेश कुमार, चमन लाल, मनोज कुमार, रजनीश, हंस राज व सीटू के जिला महासचिव राजेश शर्मा, सुरेश सरवाल, गोपेंद्र ने हिस्सा लिया।

1300 कर्मचारियों का किया जा रहा शोषण
यूनियन व सीटू पदाधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 108और 102 एम्बुलेंस कर्मचारी नेशनल हेल्थ मिशन में मेडस्वान फाउंडेशन कंपनी द्धारा वर्ष 2022 में नियुक्त किए हैं, जो पूरे प्रदेश में 1300 हैं। उससे पहले ये सभी कर्मचारी जीवीके कंपनी ने 2010 में नियुक्त किए थे लेकिन उस कंपनी द्धारा इन्हें छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी व अन्य भत्ते भी नहीं दिए हैं और स्वास्थ्य मिशन मूकदर्शक बना हुआ है। लेकिन इनका नियोक्ता कंपनी द्वारा लंबे समय से शोषण किया जा रहा है।

नहीं दिया जा रहा न्यूनतम वेतन
इन कर्मचारियों को निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है और इनसे 12 घण्टे ड्यूटी करवाई जाती है लेकिन उसका ओवरटाइम कंपनी अदा नहीं करती है। हिमाचल हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला व श्रम कार्यालय के आदेशों के बाबजूद इनका शोषण जारी है।

मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा
यही नहीं जब कभी मज़दूर यूनियन के माध्यम से अपनी मांगो के लिए आवाज़ उठाते हैं तो उन्हें मानसिक रूप में प्रताड़ित किया जाता है।कर्मचारियों ने पहले भी दो बार एक एक दिन की हड़ताल की जा चुकी है लेकिन उसके बाद भी कंपनी ने न्यूनतम वेतन औऱ ओवरटाईम अदा नहीं किया है। इसलिए इस बार दो दिन की हड़ताल की जा रही है।

तो अनिशिचतकालीन हड़ताल होगी
सीटू ज़िला महासचिव राजेश शर्मा ने कहा कि यदि कंपनी द्धारा इन्हें सरकारी नियमानुसार वेतन, ओवरटाईम, सभी प्रकार की छुटियां, गाड़ी की मेंटीनेंस, इंसोरेंस और कर्मचारियों की बीमारी के दौरान पूरा वेतन देने, हाईकोर्ट व श्रम विभाग के आदेशों, यूनियन नेताओं की प्रताड़ना की नीति को नहीं बदला तो यूनियन को अनिशिचतकालीन हड़ताल का निर्णय लेना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व कंपनी की होगी।

उन्होंने राज्य सरकार द्वारा हड़ताल को कुचलने के लिए लगाए एसमा कानून के निर्णय की भी कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि यदि किसी कर्मचारी को इसके बहाने प्रताड़ित किया गया तो यूनियन उसका कड़ा विरोध करेगी और मांगों को नहीं माना गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकती है।