जेपी अस्पताल में दवा के नाम पर ‘मौत की खुराक’! मरीज को थमाई फफूंद लगी दवा, पैकेट देखते मचा हड़कंप

भोपालः प्रदेश में ‘कोल्ड्रिफ सिरप कांड’ की दहशत अभी कम भी नहीं हुई थी कि अब अस्पताल प्रबंधन की एक और बड़ी लापरवाही ने मरीजों की जान जोखिम में डाल दी है। राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित जय प्रकाश (जेपी) जिला अस्पताल में मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल, अस्पताल इलाज कराने आए एक गरीब मरीज को फार्मेसी से ऐसी दवा दी गई, जिस पर फफूंद (फंगस) की सफेद परत जमी हुई थी।

इलाज कराने गए मरीज को मिला ‘जहर’
ओपीडी में पहुंचे मरीज सतीष सेन को पैर में चोट के कारण दर्द निवारक ‘डिक्लोफेनाक’ टैबलेट दी गई थी। हैरानी की बात यह है कि दवा की स्ट्रिप पर एक्सपायरी डेट जून 2027 अंकित है, लेकिन उसके भीतर की गोलियां पूरी तरह फफूंद से ढकी हुई थीं। मरीज का कहना है, ‘अगर मैं यह दवा खा लेता, तो मेरी जान का जिम्मेदार कौन होता? क्या सरकारी अस्पताल अब इलाज की जगह जहर बांट रहे हैं?’

फाइलों में फिट, हकीकत में अनफिट
यह दवा (बैच नंबर DSM 25002) मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम (MPPHSCL) द्वारा अक्टूबर 2025 में ही सप्लाई की गई थी। सरकारी रिकॉर्ड में दवा सुरक्षित है, लेकिन धरातल पर यह ‘स्लो पॉइजन’ बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, फफूंद लगी दवा खाने से लिवर, किडनी फेलियर और गंभीर संक्रमण का खतरा होता है।

CMHO से शिकायत, दोषियों पर लटकी तलवार
मरीज ने इस जानलेवा लापरवाही की शिकायत CMHO डॉ मनीश शर्मा से साक्ष्यों के साथ की है। मामले के तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल के दवा भंडार की नियमित जांच नहीं होती? या फिर कमीशन के खेल में मरीजों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है?