मध्य प्रदेश में नया लेबर कोड लाने की तैयारी, नाइट शिफ्ट वालों को रात में 1 घंटे के काम के बदले मिलेगा डेढ़ घंटे का पैसा

भोपाल: मध्य प्रदेश में नाइट शिफ्ट करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार अगले हफ्ते विधानसभा में ‘एमपी कोड ऑन एम्पावरिंग वर्क स्पेसेज, 2026’ विधेयक पेश करने जा रही है। इस नए ड्राफ्ट कोड के तहत अगर आप रात में ड्यूटी करते हैं, तो आपको दिन में काम करने वाले कर्मचारियों के मुकाबले ज्यादा सैलरी मिल सकती है।

नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, रात के समय किए गए 1 घंटे के काम को वेतन और काम के घंटों की गणना के लिए दिन के डेढ़ घंटे के बराबर माना जा सकता है।

जापान के मॉडल पर तैयार हुआ नियम
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह अनोखा प्रावधान जापान और अन्य विकसित देशों के नाइट-वर्क मॉडल का अध्ययन करने के बाद शामिल किया गया है। इन देशों में जैविक घड़ी और सामाजिक जीवन में आने वाले व्यवधान को देखते हुए रात में काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त मुआवजा या बढ़ा हुआ वेतन दिया जाता है। ड्राफ्ट के मुताबिक, सरकार जल्द ही इस बढ़ी हुई मजदूरी के स्ट्रक्चर और लागू होने की तारीख को नोटिफाई करेगी।

रेस्टोरेंट रात 1:30 बजे और सिनेमा हॉल 1 बजे तक ही सीमित। रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान 24 घंटे खुल सकेंगे।

रात 1:30 से सुबह 4 बजे तक अनिवार्य बंदी (रेलवे स्टेशन जैसे हब प्रभावित)। अनिवार्य बंदी खत्म, ट्रांसपोर्ट हब के पास की दुकानें खुली रहेंगी।

नाइट शिफ्ट और डे शिफ्ट के लिए समान वेतन गणना। रात का 1 घंटा = दिन का 1.5 घंटा (ज्यादा सैलरी का प्रावधान)।

महिलाओं को नाइट शिफ्ट की मंजूरी
इस नए कानून में महिलाओं के कार्यस्थल को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते नियोक्ता केंद्र सरकार के ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड, 2020 के तहत तय सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लिखित सहमति की शर्तों को पूरा करते हों।

इसके साथ ही, नए कानून के तहत राज्य में दुकानों, मॉल और दफ्तरों को 24 घंटे यानी सातों दिन चौबीस घंटे संचालित करने की छूट दी जाएगी। हालांकि, सरकार शराब दुकानों जैसी विशिष्ट श्रेणियों के लिए अलग से काम करने के घंटे तय करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखेगी।