जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने पत्नी की हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 7 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया है. कोर्ट ने माना कि घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी, बल्कि पत्नी के कथित अपमानजनक शब्दों से उत्पन्न अचानक और गंभीर उकसावे (Grave and Sudden Provocation) के कारण हुई थी.
छिंदवाड़ा में पति ने की थी प्रेग्नेंट पत्नी की हत्या
यह मामला छिंदवाड़ा के चौरई ब्लॉक के शिव कहार का है. 18 सितंबर 2021 को छिंदवाड़ा के चौरई ब्लॉक के गांव में शिवा कहार ने अपनी पत्नी किरण की हत्या कर दी थी. जबकि किरण 7 महीने की गर्भवती थी. शिवा ने किरण के सिर पर एक पत्थर मारा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. इस घटना के बाद शिवा ने खुद ही फोन करके पत्नी की हत्या की जानकारी अपने ससुर और पुलिस स्टेशन को पहुंचाई थी. इसके बाद शिवा को गिरफ्तार कर लिया गया था.
शिवा कहार ने अपने बयान में बताया था कि, ”उसका और उसकी पत्नी किरण के बीच में विवाद हुआ था. जिस विवाद में उसकी पत्नी किरण ने कहा था कि, तेरे जैसे हजार पति कर लूंगी. यह सुनकर मुझे गुस्सा आ गया और मैंने पास में ही पड़े एक पत्थर को किरण के सिर पर मार दिया, जिससे उसकी मौत हो गई.” इस मामले में छिंदवाड़ा जिला अदालत में ट्रायल चली और जिला अदालत में शिवा कहार को धारा 304 एक के तहत आजीवन कारावास की सजा दी थी. लेकिन शिवा कहार की ओर से ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अपील की गई थी.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना- योजनाबद्ध नहीं थी हत्या
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने छिंदवाड़ा जिले के चौरई निवासी शिवा की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया कि, शिवा कहार ने अपनी पत्नी किरण की किसी योजनाबद्ध तरीके से हत्या नहीं की है. बल्कि शिवा पत्नी के द्वारा कहे गए शब्दों से उत्तेजित हो गया था, जिसकी वजह से उसने गुस्से में अपनी पत्नी की हत्या कर दी.
वहीं, कोर्ट का कहना है कि, हत्या करने के बाद शिव मौके से भागा नहीं बल्कि उसने खुद ही इसकी जानकारी पुलिस और परिजनों को दी. इसलिए स्पष्ट है कि वह अपनी पत्नी को मारना नहीं चाहता था. इसलिए उसे आजीवन कारावास की बजाए 7 साल का कठोर कारावास देने का आदेश दिया है.
विवाद में मर्यादा बनाएं रखें
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला देते हुए कहा कि, गंभीर और अचानक उकसावे की स्थिति में हत्या के मामलों में अपराध की प्रकृति का अलग ढंग से मूल्यांकन किया जा सकता है. इस मामले को देखकर ऐसा लगता है कि लोगों को घरेलू बातचीत में इस बात का ध्यान रखना चाहिए की बातचीत की मर्यादा सीमा के बाहर ना हो नहीं तो यह जानलेवा साबित हो सकती है.