मध्य प्रदेश में 200 इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सिर्फ 1 चार्जर, लंबी दूरी की यात्रा से पहले पढ़ लें ये रिपोर्ट

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन राज्य में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की भारी कमी है। जहां सरकार ईवी अपनाने को प्रोत्साहित कर रही है, वहीं ईवी से जुड़े सड़क हादसों में भी बढ़ोतरी हुई है। एमपी सरकार 8 दिसंबर 2025 से इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। इसका मकसद पर्यावरण को बचाना है। इससे जुड़े मामलों के आकड़े राज्यसभा में पेश किए गए हैं।

200 ईवी पर एक चार्जिंग स्टेशन
सरकार ने ईवी पर मोटर वाहन टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया है। केंद्र सरकार भी फेम इंडिया स्कीम और पीएम ई ड्राइव स्कीम के तहत ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करोड़ों रुपये दे रही है। साथ ही, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। लेकिन, इन सबके बावजूद, मध्य प्रदेश में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की हालत चिंताजनक है। हर 200 ईवी पर सिर्फ एक चार्जिंग स्टेशन है।

एमपी ईवी चार्जिंग में नौवें स्थान पर
राज्य में 2 लाख से ज्यादा ईवी हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन केवल 1,146 हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश नौवें स्थान पर है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली, तमिलनाडु, राजस्थान, केरल और गुजरात जैसे राज्य हमसे आगे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निजी कंपनियां भी सरकार के दिशानिर्देशों के तहत ईवी चार्जिंग पॉइंट लगा सकती हैं।

एक्सीडेंट के मामले में भी आगे
चिंता की बात यह है कि ईवी से जुड़े सड़क हादसों में भी मध्य प्रदेश आठवें स्थान पर है। पिछले साल 2024 में, ईवी से जुड़े हादसों में 89 लोगों की जान गई और 868 लोग घायल हुए। राज्य में कुल 663 ईवी हादसे हुए। उत्तराखंड इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां ईवी हादसों में 369 लोगों की मौत हुई।