सिंगरौली: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में हुआ दोहरा हत्याकांड सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि अंधविश्वास, डर और शक की उस खतरनाक मानसिकता का नतीजा है, जिसने इंसान को हैवान बना दिया. NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो इस हत्याकांड की सच्चाई बयां करते हैं.
दरअसल, यह मामला सिंगरौली जिले के जियावन थाना क्षेत्र के अंतरवा गांव का 11 फरवरी की रात 2026 है. जहां 21 वर्षीय आरोपी छत्रपति सिंह ने संतान न होने और पत्नी के गर्भपात का जिम्मेदार पड़ोसियों के जादू-टोने को माना. इसी सनक में उसने केमला सिंह (65) और फूलमती सिंह (50) की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या कर दी. इस हमले में सुमित्रा सिंह और रामभजन गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है. वारदात के बाद हत्यारे ने खुद को घर में कैद कर लिया था, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया. फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है. इस हत्याकांड की पड़ताल के लिए NDTV की टीम जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर अंतरवा गांव की लोहरा बस्ती पहुंची, जहां अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है, लोग दहशत में हैं.
खामोशी से पहले की वो रात
ग्रामीणों के मुताबिक, घटना वाली रात गांव में सब कुछ सामान्य था. लोग अपने-अपने घरों में थे, लेकिन आरोपी के मन में उथल-पुथल मची हुई थी. वह पिछले कई दिनों से डरा हुआ, चिड़चिड़ा और शंकालु व्यवहार कर रहा था. उसे यह भ्रम हो गया था कि दो लोग उस पर जादू-टोना कर रहे हैं, जिससे उसकी पत्नी के संतान होने में बाधा आ रही है.
आधी रात को कुल्हाड़ी लेकर गांव में निकला
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि आरोपी छत्रपति सिंह उम्र 21 वर्ष ने बिना किसी ठोस वजह के पीड़ितों को अपना दुश्मन मान लिया. अंधविश्वास के इस जाल में फंसा आरोपी यह मान बैठा कि अगर उन्हें खत्म कर दिया जाए तो उसका डर और परेशानी खत्म हो जाएगी. इसी वहम ने उसे कुल्हाड़ी उठाने पर मजबूर कर दिया. आधी रात को वह कुल्हाड़ी लेकर गांव में निकला और जिन पर उसे जादू-टोना करने का शक था, उनके घर पहुंचा. उसने 50 वर्षीय फूलकुमारी सिंह को घसीटकर बाहर निकाला और अपने घर ले गया. फूलकुमारी के घर उस वक्त उसकी बहू और दो छोटे बच्चे थे. बहू ने रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी के हाथ में कुल्हाड़ी थी, जिस वजह से वह हिम्मत नहीं जुटा पाई. बहू की आंखों के सामने ही आरोपी ने फूलकुमारी पर कुल्हाड़ी से कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
इसके बाद, आरोपी फिर गांव में कुल्हाड़ी लेकर निकला और 65 वर्षीय केमला सिंह के घर पहुंचा. केमला सिंह घर में अकेले थे. जैसे ही आरोपी उनके घर में दाखिल हुआ, वे डर गए. शोर मचाने से पहले ही आरोपी ने कुल्हाड़ी का डर दिखाकर उन्हें अपने घर ले आया, जहां उसने केमला सिंह पर कई वार किए. कुल्हाड़ी के प्रहार से केमला सिंह का सिर धड़ से अलग हो गया. यह पूरी घटना फूलकुमारी की बहू ने आरोपी के घर के बाहर से देखी, लेकिन डर के कारण वह शोर नहीं मचा सकी.
कुल्हाड़ी देखकर कोई पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाया
गांव के रंगदेव सिंह बताते हैं कि घटना वाली आधी रात को 8 से 10 गांव के लोग चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपी के हाथ में कुल्हाड़ी देखकर कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाया. डर इतना ज्यादा था कि लोग अपनी जान बचाकर वहां से भाग गए. सुबह पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपी अपने घर के आंगन में दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद खुद को एक कमरे में बंद कर चुका था. पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला और गिरफ्तार कर लिया.
कुल्हाड़ी से मौत का तांडव
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने अचानक हमला किया. बचाव का मौका तक नहीं मिला. सिर पर किए गए ताबड़तोड़ वार इतने बेरहमी भरे थे कि मौके पर ही दोनों की मौत हो गई. वारदात के बाद पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और दहशत का माहौल बन गया.
अंधविश्वास और शक हत्या की वजह
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया. पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए अंधविश्वास और शक को हत्या की वजह बताया. एसडीओपी गायत्री तिवारी ने NDTV को बताया कि यह मामला पूरी तरह मानसिक भ्रम और सामाजिक कुरीतियों से जुड़ा हुआ है.