मऊगंज : मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. देर रात के छापों से लेकर मीलों दूर के गांवों में होने वाली रूटीन ज़ब्ती तक, कई मामलों में एक ही नाम के सरकारी गवाहों की मौजूदगी अब सवालों के घेरे में है. डिजिटल क्राइम रिकॉर्ड्स की जांच पर खुलासा हुआ है कि लौर और नईगढ़ी पुलिस थानों में दर्ज सैकड़ों मुकदमों में सरकारी गवाह के तौर पर सिर्फ छह ही लोग बार-बार नाम आ रहे हैं. यह मामला अब बड़ा विवाद बन चुका है और थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं.
यह पैटर्न गृह मंत्रालय की परियोजना ‘क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स’ (CCTNS) के जरिए उपलब्ध FIR रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया. दस्तावेजों के अनुसार, अलग-अलग तारीखों, स्थानों और मामलों में एक ही गवाहों के नाम दर्ज हैं, जिससे उनकी एक साथ कई जगह मौजूदगी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
1000 FIR में 6 ही गवाहों के नाम
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, RTI कार्यकर्ता कुंज बिहारी तिवारी ने 2022 में पहली शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने विस्तृत सबूतों के साथ दूसरी शिकायत की. तिवारी का आरोप है कि नईगढ़ी और लौर थानों के पूर्व प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर ने अपने पद का दुरुपयोग कर 150 से ज्यादा संदिग्ध एफआईआर दर्ज कराए. इन मुकदमों में कुछ चुनिंदा लोगों को ही गवाह बनाकर पुलिस कार्रवाई को वैध दिखाया जाता था. जांच में पाया गया कि वर्ष 2000 से अब तक करीब 1,000 एफआईआर में छह लोगों के नाम का बतौर गवाह बार-बार इस्तेमाल हुआ है.
इन छह ‘सुपर गवाहों’ में अमित कुशवाहा का नाम सबसे आगे है, जो एसएचओ जगदीश ठाकुर के ट्रांसफर होने पर भी उनके साथ चलता रहा. वहीं दूसरे नामों में सब्जी विक्रेता दिनेश कुशवाहा और पेशे से ड्राइवर राहुल विश्वकर्मा शामिल हैं. टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार दिनेश कुशवाहा ने बताया, ‘मैंने सिर्फ एक-दो मामलों में गवाही दी थी जहां मैं मौजूद था. बाकी मामलों में पुलिस ने मेरे नाम बिना मेरी जानकारी के लिख दिए.’ वहीं राहुल विश्वकर्मा कहते हैं, ‘मैं आरोपी के गिरफ्तार होने के बाद थाने पर साइन करता था, लेकिन इतने सारे मुकदमों में गवाह नहीं बनाया गया.’
थाना प्रभारी पर क्या हुआ एक्शन?
वहीं आईटीआई कार्यकर्ता कुंज बिहारी तिवारी ने दावा किया कि उन्होंने एक साल से ज्यादा की एफआईआर जांच की, जिसमें 200 से ज्यादा मामलों में ये नाम दोहराए गए. उन्होंने खुद को भी पीड़ित बताया और कहा, ‘मुझे इसी अधिकारी ने फर्जी मामले में फंसाया था.’ टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने रविवार को जगदीश सिंह ठाकुर को नईगढ़ी थाना प्रभारी पद से हटा दिया.