साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था बीसीए का छात्र व कार चालक

मुजफ्फरनगर। देश-विदेश में साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला बीसीए का छात्र समेत कार चालक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए साइबर ठग गिरोह से जुड़े थे। दोनों आरोपित पांच प्रतिशत कमीशन के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इनके खातों में 80 लाख रुपये का लेन-देन मिला है। उक्त गिरोह तीन माह में 18 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। ठगों का साथी फरार है, जिसकी तलाश में टीम लगी है।

बुधवार को साइबर थाना पुलिस मुख्यालय पर पत्रकार वार्ता में एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि 12 फरवरी को साइबर ठगों को म्यूल खाते देने वाले सरगना मयूर अफजाल राना, नदीम और गुफरान को पकड़ा था। तब इनके गिरोह की कुंडली खंगालने के साथ पुलिस जांच-पड़ताल में लगी थी। बुधवार को पुलिस ने मुहल्ला रामपुरम में दबिश देकर तालिब पुत्र असमल निवासी भोजपुर, गाजियाबाद तथा खालापार के अंबा विहार से अरमान पुत्र असलम को गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से तीन मोबाइल बरामद हुए हैं।

एसपी क्राइम ने बताया कि दोनों साइबर ठगों को म्यूल खाते उपलब्ध कराते थे। प्रत्येक खाते में आने वाली रकम पर पांच प्रतिशत कमीशन लेते थे। पिछले माह में इनके द्वारा 10 से अधिक बैंक खाते दिए गए, जिनमें 80 लाख रुपये का लेनदेन मिला है। दोनों साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के सरगना मयूर से जुड़े हैं। यह गिरोह तीन माह में लगभग 30 लोगों को शिकार बनाकर 18 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपित अरमान शहर के एक कालेज से बीसीए का छात्र है, जबकि तालिब कार चालक है। आरोपित छात्र ने गुमराह करने के लिए फर्जी अरमान ट्रांसपोर्ट कंपनी बनाई, जिसका बैंक खाता साइबर ठगी में प्रयोग किया। पुलिस पूरे गिरोह के बैंक खातों को खंगाल रही है। इनका साथी सुजडू निवासी रिहान फरार है, जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

शौक पूरा करने के लिए साइबर ठगों से जुड़े
एसपी क्राइम इंदू सिद्धार्थ ने बताया कि अरमान पढ़ाई कर रहा है। जिसके चलते उसने शौक पूरा करने के लिए साइबर गिरोह से जुड़ गया, जबकि तालिब अमीर बनने की चाहत में ठगों से जुड़ा था। आरोपित अरमान ने छह बचत तथा एक चालू खाता सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा समेत एक्सिस बैंक का है। दोनों के बैंक रिकार्ड से आनलाइन महंगे परफ्यूम, कपड़े, खान-पान समेत गैजेट्स की खरीदारी की गई है। दोनों ठगी के रुपयों से अपने शौक पूरा करते थे।

डालर में रकम बदलते थे आरोपित
अरमान और ताबिल अपने खातों में आई रकम को निकालकर सरगना मयूर अफजाल को देते थे। अफजाल दिल्ली जाकर ठगी के रुपयों को डालर में बदलता था। वहीं दोनों को प्रत्येक खाते देने पर चार हजार रुपये तथ पांच प्रतिशत कमीशन मिलता था। अरमान गिरोह में प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये वेतनमान पर काम कर रहा था। गिरोह कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, चेन्नई, उड़ीसा, केरलम समेत आंध्र प्रदेश में 30 लोगों को शिकार बना चुका है।