मुजफ्फरनगर में दहेज हत्या में पति को 15 साल और ससुर व दो भाइयों को 10-10 साल की सजा

मुजफ्फरनगर। दहेज की वेदी पर एक और विवाहिता की बलि चढ़ाने वाले आरोपियों को अदालत ने कड़ा सबक सिखाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नेहा गर्ग की अदालत ने विवाहिता आयशा की हत्या के मामले में दोषी पाए गए पति शहजान को 15 वर्ष और ससुर सगीरुद्दीन व दो अन्य परिजनों (आजाद और आरिफ) को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

शादी की पहली सालगिरह पर ही ले ली थी जान अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुजफ्फरनगर के अंबा विहार निवासी आयशा का विवाह 16 नवंबर 2015 को शामली के थानाभवन निवासी शहजान के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले कार और अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर आयशा को प्रताड़ित करने लगे थे। विवाह की पहली सालगिरह यानी 16 नवंबर 2016 को दहेज की मांग पूरी न होने पर आयशा की हत्या कर दी गई और मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटका दिया गया।

शासकीय अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी से मिला न्याय घटना के अगले दिन 17 नवंबर 2016 को मृतका के परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शासकीय अधिवक्ता अरुण जावला ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए ठोस साक्ष्य पेश किए। मामले की गंभीरता और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए न्यायाधीश नेहा गर्ग ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। इस फैसले के बाद मृतका के परिजनों ने राहत की सांस ली है।