मुजफ्फरनगर। विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए सभी स्कूल-कॉलेजों में समाचार पत्रों को पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए शासन से निर्देश जारी हुए हैं। इससे छात्र-छात्राओं में पढ़ने की आदत का विकास होगा।
साथ ही मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक्स गेजेट्स पर स्क्रीन टाइम में कमी होगी। शासन के निर्देश को डीएम, डीआईओएस और बीएसए ने सराहा है। डीआईओएस और बीएसए ने प्रधानाचार्याें को इस बारे में निर्देश जारी किए हैं।
डीएम, डीआईओएस और बीएस को शासन से जारी निर्देशों में कहा गया है कि रीडिंग कैंपेन को प्रभावी बनाने के लिए पुस्तकों के साथ-साथ समाचार पत्रों को भी विद्यालय की दैनिक पठन संस्कृति का अनिवार्य अंग बनाया जाए। इससे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी।
सामान्य ज्ञान और समसामयिक विषयों पर पकड़ मजबूत बनेगी। नियमित पठन से विद्यार्थियों की शब्दावली और भाषा शैली में सुधार होगा। विभिन्न प्रकार के लेख और संपादकीय पढ़ने से उनकी लेखन क्षमता विकसित होगी।
इसी क्रम में आलोचनात्मक व तार्किक सोच विकसित होगी और एकाग्रता में वृद्धि होगी। प्रार्थना सभा में प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट का समय समाचार वाचन के लिए निर्धारित किया जाए। इसमें रोटेशन के आधार पर विद्यार्थी संपादकीय लेख के मुख्य अंश, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और खेल जगत की प्रमुख सकारात्मक खबरें पढ़कर सुनाई जाए।