मुजफ्फरनगर में रालोद के जिलाध्यक्ष संजय राठी को मिली बड़ी राहत

मुज़फ्फरनगर- जनपद की एक अदालत ने वर्ष 2005 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान हुए चर्चित सोंटा बूथ विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और गुण-दोष के आधार पर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के वर्तमान जिलाध्यक्ष संजय राठी समेत चार आरोपियों को सभी गंभीर आरोपों से दोषमुक्त कर बरी कर दिया है। यह कानूनी लड़ाई लगभग 21 वर्षों तक चली, जिसके सुखद अंत पर रालोद कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला थाना मंसूरपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव सोंटा का है। वर्ष 2005 में जिला पंचायत चुनाव के दौरान मतदान के दिन बूथ पर भारी हंगामा और विवाद हुआ था। तत्कालीन उपनिरीक्षक नानक चंद ने थाना मंसूरपुर में तहरीर देकर संजय राठी, यशपाल राठी, जितेंद्र, कालूराम, ओमकार और देवेंद्र के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इन सभी पर बूथ लूटने का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा डालने, राज्य कर्मचारी पर जानलेवा हमला करने (धारा 307) और 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट जैसी संगीन धाराओं में मामला पंजीकृत किया था।

लंबी कानूनी लड़ाई और न्याय

मुकदमे की लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान दो अभियुक्तों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष चार आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रवण कुमार ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप निराधार थे और अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंततः संजय राठी और उनके साथियों को बरी करने का आदेश दिया।

राहत और खुशी का माहौल

बरी होने के बाद रालोद जिलाध्यक्ष संजय राठी ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सत्य की जीत पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत चुनाव के दौरान हुए एक छोटे से विवाद को राजनीतिक विद्वेष के चलते गंभीर धाराओं में बदल दिया गया था, लेकिन दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद आज उन्हें न्याय मिला है। फैसले के बाद कचहरी परिसर में समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।