CJI Suryakant on Cockroach Janta Party: सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी वालों ने डेरा जमा रखा है. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं. सीजेपी प्रोटेस्ट के बीच सीजेआई सूर्यकांत ने कॉकरोच वाले बयान पर टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरोच वाली उनकी टिप्पणी सभी युवाओं के लिए नहीं थी. युवाओं का तो वो सम्मान करते हैं. कॉकरोच वाली टिप्पणी तो केवल उनके लिए थी, जो फेक डिग्री लेकर वकालत के पेशे में आ गए हैं.
सीजेआई सूर्यकांत ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि फेक लॉ डिग्री का मुद्दा सबसे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उठाया था. उसी संदर्भ में उन्होंने कॉकरोच वाली टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा, ‘मेरी टिप्पणी उन वकीलों के बारे में थी, जो फर्जी डिग्री के आधार पर पिछले दरवाजे से वकालत के पेशे में आए हैं. चर्चा इस बात पर हो रही थी कि फर्जी लॉ डिग्री के मामले को कैसे खत्म किया जाए, सिस्टम को कैसा साफ-सुथरा किया जाए. उसी संदर्भ में मैंने यह बात कही थी.’ गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में मई महीने में सीजेआई सूर्यकांत ने कॉकरोच वाली टिप्पणी की थी. इसके बाद ही अभिजीत दिपके ने कॉकरोच जनता पार्टी बनाई थी.
सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हमेशा खुले
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जब वे यात्रा करते हैं, तो कई युवा उनसे मिलने आते हैं. मुझे देश के युवाओं से ही ताकत मिलती है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं और संवैधानिक सिद्धांतों या देश के कानून के तहत जो भी संभव होगा, शिकायतों का समाधान किया जाएगा.’ उन्होंने कहा, ‘अगर देश के युवाओं की कोई शिकायत है जिसका वे न्यायिक मंच के जरिए समाधान चाहते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले हैं.’
सीजेआई सूर्यकांत ने की टिप्पणी से हुआ था हंगामा
गौरतलब है कि 15 मई को सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कॉकरोच वाली टिप्पणी की थी. इसमें उन्होंने लॉ की पढ़ाई करने वाले बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी. इससे काफी हंगामा हुआ था. इतना ही नहीं, देश में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ तक बन गई थी. कई लोगों ने इसे केवल वकालत के पेशे के बजाय पूरे युवा समुदाय पर टिप्पणी के तौर पर लिया था. जब टिप्पणी खूब वायरल हुई तो अगले दिन सीजेआई ने कहा था कि उनकी बात को गलत तरीके से कोट किया गया.