कॉकरोच के बाद अब परजीवी! CJI सूर्यकांत अब किस मामले में कर गए इतनी सख्त टिप्पणी?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ‘काक्रोच’ के बाद अब जमानत लेने आए एक साइबर अपराधी को ‘परजीवी’ कह दिया है. साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. बुधवार (17 जून) को एक साइबर ठगी का आरोपी जब अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए कोर्ट में पहुंचा था तब सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि ऐसे अपराधों को किसी भी तरह से हल्के में नहीं लिया जा सकता. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि साइबर अपराधी समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं. चीफ जस्टिस ने ऐसे लोगों को फटकार लगाते हुए ‘परजीवी’ कह डाला.

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि साइबर अपराधों का दायरा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहता. अक्सर ठग एक राज्य में बैठे व्यक्ति को निशाना बनाते हैं, दूसरे राज्य में धन का लेन-देन कराते हैं और तीसरे राज्य से पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं. कोर्ट ने माना कि ऐसे अपराध संगठित और व्यापक स्तर पर किए जाते हैं, इसलिए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज के हित में ऐसे आरोपियों को जेल में रखना कई मामलों में आवश्यक हो सकता है, क्योंकि साइबर अपराध आम नागरिकों के आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के नुकसान का कारण बनते हैं.

‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों पर पहले भी सक्रिय रहा है सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में बढ़े तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ऑनलाइन ठगी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता जता चुका है. अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस समस्या पर सुनवाई शुरू की थी. इसकी पृष्ठभूमि में हरियाणा के अंबाला के एक बुजुर्ग दंपती की शिकायत थी, जिन्होंने पत्र लिखकर बताया था कि साइबर ठगी के कारण उनकी जीवनभर की बचत चली गई. इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने जांच एजेंसियों को मामलों की प्रभावी जांच के लिए आवश्यक कदम उठाने की छूट दी थी और केंद्र व राज्य सरकारों को भी साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए थे.

पहले भी चर्चा में रही हैं सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणियां
यह पहला अवसर नहीं है जब मुख्य न्यायाधीश की किसी टिप्पणी ने व्यापक चर्चा पैदा की हो. पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान भी उन्होंने न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर कड़ी टिप्पणी की थी. उस दौरान उन्होंने कहा था कि व्यवस्था को कमजोर करने वाले लोगों के साथ खड़े होने की बजाय कानूनी पेशे की गरिमा और विश्वसनीयता को मजबूत किया जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ लोगों के संदर्भ में भी उन्होंने तीखी टिप्पणियां की थीं, जिन पर बाद में सार्वजनिक बहस देखने को मिली.

साइबर अपराध पर बढ़ती चिंता
वहीं इस मामले के विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर ठगी के मामले भी बढ़े हैं. फर्जी कॉल, निवेश योजनाएं, बैंकिंग धोखाधड़ी और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी को साइबर अपराध के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है.