कैरिबियन सागर में इन दिनों जमकर हलचल मचा हुआ है. अमेरिका ने वेनेजुएला के तट पर F-35 फाइटर जेट्स, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और एक न्यूक्लियर सबमरीन भेज दी हैं. वैसे तो ये सब कुछ अमेरिका की तरफ से ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ जंग लड़ने की तैयारी बताया जा रहा है, लेकिन वेनेजुएला ने इसे सीधे आक्रमण की धमकी माना. और राष्ट्रपति मादुरो ने ट्रंप की सेना से लड़ने के लिए तैयारी कर ली है. आइए जानते हैं इस तनाव की पूरी कहानी.
अमेरिकी F-35 फाइटर जेट्स तैनात
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, F-35 फाइटर जेट्स, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और एक न्यूक्लियर सबमरीन वेनेजुएला तट पर 36 घंटों में पहुंच जाएंगे. ये सब कुछ ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ बताया जा रहा है, लेकिन वेनेजुएला इसे सीधी आक्रमण की धमकी के तौर पर मान रहे हैं. राष्ट्रपति मादुरो ने कहा है कि ये हमारे क्षेत्र पर हमले की तैयारी है. जिसके बाद वेनेजुएला में दहशत फैल गई है.
मादुरो ने लगाई इमरजेंसी, 3.7 मिलियन मिलिशिया फोर्सेस किया तैनात
इस तनाव के बीच मादुरो ने फौरन स्टेट ऑफ इमरजेंसी लगा दिया है. पूरे देश की आर्म्ड फोर्सेस हाई अलर्ट पर हैं. सबसे चौंकाने वाली बात. 3.7 मिलियन मिलिशिया फोर्सेस को एक्टिवेट कर दिया गया है. ये आम नागरिकों से बने सैनिक हैं, जो जंग लड़ने को तैयार हैं. CNN की रिपोर्ट में मादुरो के हवाले से कहा गया, “कोई साम्राज्य वेनेजुएला की पवित्र मिट्टी को छू नहीं सकता. हम 4.5 मिलिशिया फोर्सेस को तैनात कर रहे हैं.” ये संख्या सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. वेनेजुएला ने अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलिटराइज कर दिया है. एयर डिफेंस सिस्टम लगाए हैं. सबमरीन्स और फाइटर जेट्स को एंटी-शिप मिसाइलों से लैस किया है. रूसी बनाए सु-30 जेट्स को भी तैयार रखा है. अल जजीरा के मुताबिक, “मादुरो ने कहा, अमेरिकी सैनिकों का आना नामुमकिन है, हम संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार हैं.”
लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ तनाव, रिजीम चेंज की सजिश
अमेरिका जिस तरह अपने कदम बढ़ा रहा है, लैटिन अमेरिका में भयंकर तनाव फैल गया है. क्यूबा के विदेश मंत्री ने अमेरिका को वेनेजुएला पर हमलों की चेतावनी दी. अमेरिकी एफ -35 जेट द्वारा हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की निंदा की है. वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि अमेरिकी स्मारक रोकी जाए. मादुरो ने कहा, “हमला वेनेजुएला पर नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका पर होगा.” सोशल मीडिया पर तूफान है. जिसके बाद CNN के अनुसार, वेनेजुएला ने रूसी फाइटर जेट्स दिखाए, जो एंटी-शिप मिसाइलों से लैस हैं. अमेरिकी नौसैनिक बिल्डअप से इस एरिया में जमकर तनाव बढ़ा है. अमेरिका इसे ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ लड़ने की तैयारी मान रहा है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं, ये जियोपॉलिटिक्स का खेल है. ट्रंप की पॉलिसी से वेनेजुएला के राष्ट्रपति को डर है. वेनेजुएला इसे रिजीम चेंज की साजिश मानता है, क्योंकि राष्ट्रपति निकोलास मादुरो पर अमेरिका ने 50 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है. वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पहले ही चरम पर है, और ये संकटपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है. रूस और क्यूबा जैसे सहयोगी वेनेजुएला के साथ बने हुए हैं, जबकि अमेरिका अपने सहयोगी, जैसे कोलंबिया के साथ मजबूत बना हुआ है.
जंग क्यों छिड़ी? ड्रग तस्करी या कुछ और?
सतह पर तो यह तनाव ड्रग वॉर जैसा लग रहा है. अमेरिका का कहना है वेनेजुएला से कोकीन तस्करी हो रही है. जिसके पीछे मादुरो को माना जाता है. लेकिन असली वजह जियोपॉलिटिक्स भी मानी जा रही है. मादुरो की जुलाई 2024 चुनाव जीत को अमेरिका ने फर्जी बताया था. विपक्षी एडमंडो गोंजालेज को असली विजेता माना था. अमेरिका उन देशों में शामिल है, जिन्होंने जुलाई 2024 में मादुरो के दोबारा जीतने को मान्यता नहीं दी है. ये तनाव 2017 से चल रहा, जब ट्रंप ने पहली बार मादुरो पर 50 मिलियन डॉलर का इनाम रखा. ड्रग चार्जेस के लिए. भले ही ट्रंप कह रहे हैं “हम रिजीम चेंज की बात नहीं कर रहे.” लेकिन रिपोर्ट्स कुछ और कहतीं हैं.
ट्रंप का क्या है टारगेट?
वैसे तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक किसी भी कार्रवाई को मंज़ूरी नहीं दी है. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने सत्ता परिवर्तन को भी एक अन्य लक्ष्य के रूप में नकारा नहीं है. हां ये जरूर है कि वेनेज़ुएला में सक्रिय ड्रग कार्टेलों के ख़िलाफ़ सैन्य हमले करने के लिए ट्रंप कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें देश के अंदर के ठिकानों पर हमला करना भी शामिल है, जो नेता निकोलस मादुरो को कमज़ोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है. फरवरी 2025 में कार्टेल्स को आतंकवादी घोषित किया गया और अब ‘नार्को-टेरर’ युद्ध चला रहे.
वेनेजुएला में सत्ता बदलने की साजिश? क्या होगा अमेरिका को फायदा
कुछ लोगों का कहना है कि ट्रंप के शीर्ष सहयोगी मादुरो को हटाने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि वेनेजुएला का नेता एक कार्टेल नेटवर्क के शीर्ष पर बैठा है.” यानी इरादा साफ है कि मादुरो को पद से हटाया जाए और अमेरिका को खूब फायदा हो. जिसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि वेनेजुएला दुनिया का सबसे ज्यादा तेल रिजर्व वाला देश है. मादुरो हटने पर अमेरिकी कंपनियां तेल एक्सप्लोर कर सकेंगी. दूसरा वेनेजुएला से 90% कोकीन अमेरिका जाता है. तीसरा, लैटिन अमेरिका में पावर में खुद को रखना और क्यूबा, निकारागुआ जैसे सहयोगियों को कमजोर करना. मिल गई ये 5 चीजें तो समझ लें घर में है देवी लक्ष्मी का वास, अथाह सुख धन की होगी प्राप्ति!