Bihar Election Result: बिहार में वो हुआ, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. एनडीए इतिहास रचते हुए 205 सीटों पर आगे चल रही है. जबकि महागठबंधन महज 31 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. महागठबंधन 26, कांग्रेस 1, सीपीआईएम 1, सीपीआईएमएल 1 सीट पर आगे है. सिर्फ किशनगंज में कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है. कांग्रेस ने एक बार फिर फ्लॉप शो दिखाया है. लेकिन इसके साथ ही पार्टी के नेता राहुल गांधी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं. हाल ही में खबर आई थी कि वह अपनी भांजी मिराया वाड्रा (प्रियंका गांधी की बेटी) के साथ लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर नजर आए थे. लेकिन कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी और उनकी भांजी की वीडियो सितंबर की है.
तो कांग्रेस के लिए बिहार में इतना बड़ा चेहरा आखिर है कहां? बीजेपी की अगुआई वाला एनडीए बिहार में ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रहा है तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि राहुल गांधी कहां हैं?
हीथ्रो एयरपोर्ट पर दिखे थे राहुल
खबरें मिल रही हैं कि राहुल गांधी मस्कट या लंदन के लिए रवाना हो गए हैं. लेकिन एक फैक्टचेक साइट न्यूजमीटर के मुताबिक अभी तक किसी भी विश्वसनीय न्यूज मीडिया ने राहुल गांधी के मिडिल ईस्ट या लंदन की फ्लाइट में होने की पुष्टि नहीं की है. अब तक किसी को इसकी जानकारी नहीं है कि राहुल गांधी आखिर किस जगह पर हैं. जबकि उनकी पार्टी बिहार चुनाव में गर्त में पहुंच गई है.
शुक्रवार को चुनाव के नतीजे जारी हुए तो बीजेपी ने भी राहुल की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘जब तक राहुल गांधी किसी दूसरे टाइम जोन में जागेंगे, एनडीए ट्रॉफी जीत चुका होगा.’ उन्होंने भी राहुल गांधी के विदेश में होने की बात कही. लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं दिया.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पिछले 63 सालों का रिकॉर्ड ब्रेक हुआ और प्रदेश में 67 प्रतिशत वोटर्स सरकार चुनने के लिए वोटिंग सेंटर्स तक पहुंचे. इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा जनमत कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा. लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इसमें से महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 71 रहा है जो अपने आप में नया रिकॉर्ड है. जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत इससे लगभग 10 प्रतिशत कम रहा.
कांग्रेस की बुरी हालत
कमाल की बात है कि ओवैसी की पार्टी कांग्रेस से सीटों के मामले में आगे चल रही है. राहुल गांधी ने अपने महागठबंधन सहयोगी तेजस्वी यादव के साथ मिलकर बिहार में जोरदार प्रचार किया. उनकी वोट अधिकार यात्रा ने 16 दिनों में 1,300 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करते हुए 23 ज़िलों का सफ़र तय किया. इस यात्रा का असली मकसद मतदाता अधिकारों और स्थानीय लोगों से बातचीत पर केंद्रित था.
उन्होंने एनडीए की डबल इंजन सरकार पर जमकर हमला किया. लेकिन वो कहते हैं ना कि जमीनी स्तर पर बदलाव एक रात में नहीं होता, खासकर बिहार जैसे राज्य में. यहीं महागठबंधन के लिए परेशानी खड़ी हो गई. जहां तेजस्वी यादव नौकरियों और बेरोजगारी की बात कर रहे थे. राहुल गांधी वोट चोरी और SIR को लेकर आरोप लगा रहे थे. भारत के सबसे पिछड़े राज्य, जहां औसत मासिक आय महज 5,700 रुपये है, की मानसिकता को इको-चेंबर के नॉलेज से ठीक नहीं किया जा सकता, चाहे वह कितना भी सटीक, समझदारी भरी या यथार्थवादी क्यों न लगे.
राहुल सितंबर में गए थे साउथ अमेरिका
इसके बाद पीएम मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जमकर रैलियां कीं. इसके बाद राहुल गांधी जैसे चुनावी सीन से बाहर हो गए. 1 सितंबर को जैसे ही वोट अधिकार यात्रा खत्म हुई, वह साउथ अमेरिका में 5 देशों के दौरे पर चले गए. इसके बाद उनका ‘हायड्रोजन बम’ यानी वोट चोरी का आरोप लगाया लेकिन यह बम फटा नहीं.
राहुल गांधी कोलंबिया यात्रा और वोट चोरी वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से मिली हल्की-फुल्की चर्चा का फायदा उठा सकते थे. तब वे अचानक गायब हो गए. उन्होंने कुछ हद तक जन सुराज के प्रशांत किशोर जैसे आलोचकों की कही बात को सही साबित कर दिया जिन्होंने कहा था, ‘ये (दिल्ली के नेता) मौसमी पक्षी हैं जो बिहार में सिर्फ चुनावों के दौरान ही पंख फड़फड़ाते हैं.’
यह ध्यान देने वाली बात है कि प्रशांत किशोर के जन सुराज ने महागठबंधन के वोटों में सेंध लगाई है. भारत के चुनाव आयोग ने अन्य के तहत 13% वोट दिखाए हैं, जिसमें किशोर की पार्टी भी शामिल है जिसने पहली बार सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि जन सुराज का पोल वेबसाइट पर अलग से ज़िक्र नहीं है.
राहुल गांधी एक बड़े नेता हैं, लेकिन बिहार में उतने बड़े नहीं. महागठबंधन की हार के बाद उनकी गैरमौजूदगी और उनकी पूरी तरह से चुप्पी इस बात का संकेत देती है.