नई दिल्ली. भारत में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ को अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. नए सोशल सिक्योरिटी कोड में जोमैटो, स्विगी, और ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर आदि को भी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लाया गया है.
इसके लिए सरकार ने ड्रॉफ्ट नियम जारी कर दिए हैं. इन ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने के लिए किसी एक ही कंपनी (एग्रीगेटर) से जुड़े वर्कर को एक साल में कम से कम 90 दिन उसी कंपनी के साथ काम करना अनिवार्य होगा. वहीं, जो लोग एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है. अगर कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करते हैं, तो उसे तीन दिन गिना जाएगा, जिससे 120 दिन का कोटा पूरा करना आसान हो जाएगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है. 16 वर्ष से अधिक आयु के हर गिग वर्कर को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जो उनके आधार कार्ड से लिंक होगा. वर्कर्स का डेटा ‘ई-श्रम’ पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा. जैसे पीएफ कटने वाले कर्मचारियों का एक परमानेंट नंबर होता है, वैसे ही गिग वर्कर्स को भी एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी. हर पंजीकृत वर्कर को एक डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जो देशभर में उनकी पहचान और पात्रता का प्रमाण होगा.
कंपनियों की होगी रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी
कंपनियों (एग्रीगेटर्स) की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने साथ काम करने वाले हर छोटे-बड़े वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपडेट करें. इसमें वे वर्कर्स भी शामिल होंगे जो किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी या सहयोगी कंपनी के जरिए काम पर लगे हैं.
क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
नए नियमों का उद्देश्य गिग वर्कर्स को वह सुरक्षा देना है जो अब तक केवल सरकारी या बड़ी निजी कंपनियों के कर्मचारियों को मिलती थी. इसके तहत निम्नलिखित लाभ प्रस्तावित हैं:
स्वास्थ्य और जीवन बीमा: वर्कर्स को मुफ्त या रियायती दरों पर स्वास्थ्य बीमा मिलेगा.
दुर्घटना कवर: काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की व्यवस्था होगी.
आयुष्मान भारत: श्रम मंत्रालय ने इन वर्कर्स को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा.
पेंशन की सुविधा: भविष्य में सरकार ऐसी योजना ला सकती है जिसमें वर्कर और कंपनी दोनों मिलकर योगदान देंगे, ताकि रिटायरमेंट के बाद वर्कर को पेंशन मिल सके.
कौन-कौन होंगे पात्र
योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ सीमाएं भी तय की गई हैं. ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, गिग वर्कर जैसे ही अपनी 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा, वह इन सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए अयोग्य हो जाएगा. यानी यह सुरक्षा मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों के लिए है. इसके अलावा, लाभ बरकरार रखने के लिए हर साल काम के न्यूनतम दिनों (90 या 120 दिन) की शर्त पूरी करनी होगी. यदि कोई वर्कर एक वित्तीय वर्ष में पर्याप्त काम नहीं करता है, तो अगले साल वह इन सुविधाओं से वंचित रह सकता है.