India resumes visas for Chinese tourist: भारत ने दुनिया भर में अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावास के माध्यम से चीनी नागरिकों को पर्यटक वीजा जारी करना फिर से शुरू कर दिया है. भारत की तरफ ये कदम LAC पर लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की जारी प्रक्रिया के तहत उठाया गया है.दरअसल, चार महीने पहले जुलाई 2024 में भारत ने बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझू और हांगकांग में स्थित मिशनों के जरिए चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा बहाल किए थे जो 2020 में अप्रैल-मई के दौरान एलएसी पर झड़प की शुरुआत के बाद निलंबित कर दिए गए थे. गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के दौरान 20 भारतीय सैनिकों और कम से कम चार चीनी सैनिकों की मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते छह दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे.
वीजा सुविधा बहाल
सूत्रों के मुताबिक नवंबर के तीसरे हफ्ते की शुरुआत में ही दुनियाभर के भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास पर चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करना शुरू कर दिया गया है. हालांकि, अभी तक इस कदम को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर करने और आगे बढ़ाने के लिए आमजन से जुड़े कई मुद्दों पर केंद्रित कदम उठाए हैं. अक्टूबर में दोबारा शुरू की गई सीधी उड़ानें इसी दिशा में भारत की तरफ से उठाया गया एक प्रमुख कदम है. इसके अलावा कैलाश-मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों के लिए वीजा सुविधा फिर से बहाल करने के साथ-साथ राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाने पर भी सहमति बनी है.
रिश्ते मजबूत करने के लिए उठाया कदम
अक्टूबर 2024 में LAC पर अग्रिम मोर्चों से सैनिकों की वापसी पर समझौता होने के बाद रूस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दोनों नेताओं ने कई तंत्रों को फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की, जो सीमा विवाद सहित अन्य मुद्दों के समाधान में भी मदद करेंगे.इसके बाद से दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के अलावा सीमा संबधित मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच लगातार बातचीत हुई है. इन बातचीत के दौर से सीमा व्यापार से लेकर आर्थिक मुद्दों तक कई क्षेत्रों में दोबारा सहयोग शुरू करने पर सहमति बनी है. चीन की तरफ से दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के निर्यात प्रतिबंध से संबंधित भारत की व्यापार चिंताओं को दूर करने के लिए भी कदम उठाए हैं. दरअसल, इन सभी भारत और चीन का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना और संबंधों को फिर से मजबूत नींव पर स्थापित करना है.