राज्यसभा में NDA को एक बार फिर खुशखबरी मिली है। हाल ही में नए सांसदों के शपथ लेते ही केंद्र में सत्तारूढ़ NDA का कुनबा बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े को छूने के बेहद करीब पहुंच गया है। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियों में टूट और लोकसभा में NDA को समर्थन देने की चर्चाओं के बीच यह खबर मोदी सरकार के लिए इसीलिए भी अहम है क्योंकि सरकार जल्द ही परिसीमन और महिला कोटा लागू कराने वाले बिल को एक बार फिर पेश कर सकती है। चर्चा है कि संसद में समीकरण बदलने के बाद इस बिल को नए सिरे से पेश करने की योजना है।
अब समझते हैं कि राज्यसभा में फिलहाल NDA के पास कितने सांसद है और उसे कितने सांसदों का समर्थन है। एनडीए की अपनी ताकत की बात करें तो 242 सीटों वाली मौजूदा राज्यसभा में एनडीए के पास अब अपने 141 सांसद हैं। सोमवार को गुजरात से भारतीय जनता पार्टी के जीतेन्द्र मेघजीभाई कंजारिया और मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से भाजपा के एम नागराजा और मध्य प्रदेश से भाजपा के तरूण चुघ ने राज्यसभा में शपथ ली।
इसके अलावा NDA के पास मनोनीत और निर्दलीय सांसदों का भी साथ है। सदन के 10 मनोनीत और स्वतंत्र सांसद भी सरकार के पाले में खड़े दिख रहे हैं। इसे मिलाकर एनडीए का आंकड़ा 151 तक पहुंच जाता है। यह साधारण बहुमत से काफी ज्यादा है। हालांकि सदन में किसी भी संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई यानी 164 मतों (कुल 245 सीटों के हिसाब से) की आवश्यकता होती है। ऐसे में एनडीए इस आंकड़े से अब महज 13 सीट दूर है।
बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस बना सकती है बात
विपक्षी इंडिया गठबंधन से अलग रहने वाले दो क्षेत्रीय दल इस बार भी मोदी सरकार के लिए बड़े मददगार साबित हो सकते हैं। फिलहाल ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) के पास 5 और आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के 4 सांसद हैं। अतीत में इन दोनों दलों ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का साथ दिया है। अगर ये 9 सांसद भी साथ आते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 160 तक पहुंच जाएगा।
इस बीच पश्चिम बंगाल से खाली हो रही राज्यसभा की 3 सीटों पर जब भी उपचुनाव होंगे, मौजूदा समीकरणों के चलते ये सीटें बीजेपी के खाते में जानी तय मानी जा रही हैं। इसके बाद एनडीए की कुल ताकत 163 हो जाएगी, जो दो-तिहाई के आंकड़े (164) से महज 1 सीट कम होगी।
लोकसभा में अब भी चुनौती
हालांकि, राज्यसभा में एनडीए की राह आसान दिख रही है, लेकिन लोकसभा में चुनौती बड़ी है। अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला टीएमसी के 20 बागी सांसदों और शिवसेना (UBT) के 6 बागियों के विलय को मंजूरी दे भी देते हैं, तब भी एनडीए 540 सीटों वाली लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 360 के आंकड़े से काफी दूर रहेगा। अभी लोकसभा में NDA के पास 300 सांसद हैं। बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन बिल पास कराने की कोशिश की थी, लेकिन वह 2 तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई।