तब तो ऑपरेशन सिंदूर भी गलत नहीं था…आसिम मुनीर के खिलाफ खड़े हुए पाकिस्तान के मौलाना

मेरा खुदा गवाह है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने अल्लाह की मदद आते हुए देखी. हमने महसूस किया… ऐसा कहने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर अब अपने ही मुल्क में घिर गए हैं. देश के कद्दावर नेता और मौलाना फजल उर रहमान ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी कार्रवाई के खिलाफ बोलते हुए ऑपरेशन सिंदूर को सही ठहरा दिया. हां, पाकिस्तानी मौलाना का वीडियो आसिम मुनीर की पॉलिसी पर तमाचा बताया जा रहा है. उनका वीडियो भारत और पाकिस्तान दोनों मुल्कों में वायरल है.

मौलाना रहमान कहते हैं कि पाकिस्तान को 78 साल से एक प्रो-पाकिस्तान अफगानिस्तान (पाकिस्तान-अफगानिस्तान के रिश्तों की हिमायती सरकार) चाहिए. लगातार प्रो-इंडियन अफगानिस्तान (भारत-अफगानिस्तान रिश्तों की हिमायती भारत सरकार) मौजूद है लेकिन प्रो-पाकिस्तान अफगानिस्तान मौजूद नहीं है. अब देखिए नाराजगी आ गई.

पाकिस्तान को फिर ऑपरेशन सिंदूर पर एतराज क्यों?
उन्होंने आगे साफ कहा कि जब काबुल पर आप (पाकिस्तानी आर्मी) बमबारी करेंगे तो जाहिर है ये ऐसा ही है जैसे कोई इस्लामाबाद पर बमबारी करे. ये तो आखिरी हद हो जाती है न. दूरदराज के इलाकों में भी अगर आप करते तो शायद कुछ बर्दाश्त किया जा सकता था. वैसे, वहां पर भी आपने कुछ कार्रवाई की है. अगर आप कहते हैं कि हमने अपने दुश्मन के उस ठिकाने पर स्ट्राइक की है जो हमारे लिए खतरा है और आप इसे जायज ठहराते हैं तो हिंदुस्तान भी आपसे कहता है कि मैंने बहावलपुर में हमला किया है, मैंने मुरीदके में हमला किया है, मैंने कश्मीर में हमले करने वालों के ठिकानों पर हमले किए हैं. आप उस फिर एतराज क्यों कर रहे हैं?

फजल उर रहमान यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि आप भारत के बयान पर एतराज करते हैं तो यही तो अफगानिस्तान कह रहा है फिर आप उसके साथ कैसे पेश आएंगे. मौलाना फजल उर रहमान पाकिस्तान की जमीयत उलमा ए इस्लाम के प्रेसिडेंट हैं. उन्होंने आगे कहा कि ईरान के बारे में आपने कहा कि बलूचिस्तान में जो कुछ हो रहा है उसके गुनहगार ईरान में हैं. और आपने ईरान पर जाकर स्ट्राइक किया. उसके बदले में ईरान ने आपके इलाके में स्ट्राइक किया. आपने कहा था कि वहां हमारे दुश्मनों के ठिकाने हैं.

ईरान से रिश्तों पर भी आर्मी चीफ को सुनाया
मौलाना ने कहा कि अब सवाल यह है कि मकसद एक ही है- ईरान के बारे में भी, अफगानिस्तान के बारे में भी. लेकिन रवैये में फर्क है. इसलिए कि ईरान की हुकूमत स्थिर है, दुनिया उसे उखाड़ने की हिम्मत नहीं कर रही. अफगानिस्तान की हुकूमत आपको ठीक नहीं लग रही लिहाजा उधर रवैया अलग रख रहे हैं. इस पर दुनियाभर में सवाल उठ रहे हैं.