नई दिल्ली. भारतीय रेलवे लगातार नए नए कीर्तिमान बना रहा है. हाल ही में वंदेभारत वंदेभारत स्लीपर के दौड़ने की डेट की घोषणा हो गयी है, जो विश्व की टॉप ट्रेनें में शामिल है. भारतीय रेलवे जल्द ही एक और खास ट्रेन का ट्रायल करने जा रहा है, यह ट्रेन वंदेभारत को भी पीछे छोड़ देगी, क्योंकि इसकी खासियत यह है कि न तो डीजल से चलेगी और न ही बिजली. सुनकर आप चौंक गए होंगे, पर यह सच है, क्योंकि यह पानी से चलेगी. जी हां, यहां पर हाइड्रोजन ट्रेन की बात की जा रही है. इसके टैंकरों में हाइड्रोजन भरने की टेस्टिंग शुरू हो चुकी है.
रेल मंत्रालय के अनुसार हरियाणा के जींद में हाइड्रोजन प्लांट को खास तरह से डिजाइन किया गया है. जिससे यहां न सिर्फ हाइड्रोजन प्रोडक्शन किया जा सके, बल्कि स्टोरेज और रिफिलिंग करने के लिए मार्डन तकीनक का इस्तेमाल किया गया है. जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन का तकनीकी रूप में ट्रायल शुरू हो जाएगा. ट्रेन का नियमित ट्रायल शुरू किया जाएगा.
प्लांट में हाइड्रोजन ट्रेन के टैंकों में हाइड्रोजन भरने की टेस्टिंग की गई है. सभी हाइड्रोजन सिलेंडरों में तय मानकों के अनुसार गैस भरी गई और प्रेशर चेक किया गया. अधिकारियों के अनुसार टेस्टिंग पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी रूप से सफल रही. इस तरह ट्रैक पर ट्रेन दौड़ाने के लिए ट्रायल रास्ता साफ हुआ है. इस ट्रेन में कुल 27 सिलेंडर लगाए गए हैं.
सिलेंडरों की क्षमता क्या है
ट्रेन में लगे प्रत्येक सिलेंडर की क्षमता 8.400 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस की है. इस तरह ट्रेन में एक बार में कुल 226.800 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकती है. हाइड्रोजन ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन में करीब 180 किमी. की दूरी तय करेगी. देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट (लगभग 90 किमी) पर किया जाएगा.
अंतिम चरण में रिफिलिंग ट्रायल्स सफल हो चुके हैं, और ट्रायल रन जनवरी 2026 में शुरू होने की संभावना है.
ट्रेन में 27 सिलेंडर लगे हैं,कुल क्षमता 226.8 किलोग्राम हाइड्रोजन.
ट्रेन 360 किग्रा हाइड्रोजन से 180 किमी की दूरी तय करेगी.
यह दुनिया की सबसे लंबी और पावरफुल ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेन मानी जा रही है.
कैसे होगा ट्रायल
ट्रायल के दौरान रिफिलिंग के दौरान प्रेशर, तापमान और लीकेज जैसी सभी तकनीकी टेस्टिंग की जाएगी. गैस रिफिलिंग की प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में की गई, जिससे सभी पैरामीटरों की जांच की सके.
क्या है रेलवे का प्लान
रेलवे मंत्रालय के अनुसार हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का उद्देश्य पर्यावरण को संरक्षित करना है. इसलिए इस इंजन को पहाड़ी इलाकों में हेरीटेज रूट पर (मसलन कालका शिमला जैसे) चलाया जाएगा. जिससे इस इंजन से पर्यावरण पर किसी का असर न पड़े.
2030 तक का क्या है प्लान
भारतीय रेलवे देशभर की सभी रेल लाइनों को इलेक्ट्रिफिकेशन कर रहा है और 2030 जीरो कार्बन की दिशा में काम कर रहा है. इसी दिशा में फ्यूल के रूप में हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाएगा. जिसको लेकर ट्रायल शुरू हो चुका है.
किन देशों से बेहतर होगी भारतीय हाइड्रोजन ट्रेन
भारत में जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन समेत कई देशों से अलग हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी. देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के कमर्शियल रनिंग की तैयारी 2028 तक पूरी हो जाएगी. इस वजह से इन सभी देशों में चल रही ट्रेनों की स्टडी कराई गयी है, जिससे सभी देशों की लेटेस्ट तकनीक को इस ट्रेन में शामिल किया जा सके.
देश में हाइड्रोजन कार की भी तैयारी
दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन कारें पहले से चल रही हैं. जापान और दक्षिण कोरिया इस क्षेत्र में सबसे आगे हैं. वहां पर सरकार हाइड्रोजन कारों को बढ़ावा दे रही है और अलग से स्टेशन भी बनाए गए हैं. जबकि अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में भी हाइड्रोजन कारें सीमित संख्या में इस्तेमाल हो रही हैं. भारत में भी हाइड्रोजन कारों चलाने की तैयारी है. कंपनियां लगातार कारों के ट्रायल कर रही हैं.