Indian Navy monitoring Chinese activities in Indian Ocean: हिंद महासागर में भारत की पकड़ कम करने के लिए चीन पिछले कई वर्षों से सुनियोजित तरीके से काम कर रहा है. कभी वह अपनी पनडुब्बियों को इस क्षेत्र में भेज रहा है तो कभी पाकिस्तान व दूसरे देशों से साझा युद्धाभ्यासों के नाम पर अपने युद्धपोतों को रवाना कर रहा है. ऐसा करके वह भारत को संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि अब हिंद महासागर में भारत एकमात्र महाशक्ति नहीं है बल्कि चीन भी एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है. चीन की इन बढ़ती गतिविधियों को भारतीय नौसेना एक बड़े खतरे के रूप में देखते हुए लगातार उसकी हरकतों की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही है. भारतीय नौसेना के उप-प्रमुख ने गुरुवार को चीनी जो बयान दिया, उसने दुनिया को भारत की सतर्कता और तैयारी का साफ संकेत दे दिया.
पाकिस्तान को युद्धपोत और पनडुब्बी दे रहा चीन
भारतीय नौसेना के उप-प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने कहा, ‘इंडियन नेवी को पता है कि चीन पाकिस्तान को पनडुब्बियां और युद्धपोत दे रहा है और जल्दी ही उनकी इंडक्शन शुरू हो जाएगी. भारत इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए है ताकि समुद्री सुरक्षा मजबूत बनी रहे.’
वात्सायन ने कहा कि पाकिस्तान जल्द ही चीन से मिली नई पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल करने वाला है. लेकिन भारत भी पीछे नहीं है. भारतीय नौसेना अपनी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता यानी पनडुब्बियों को पकड़ने और उनसे निपटने की ताकत को लगातार बढ़ा रही है.
अगले 2 साल में भारत को मिलेंगे नए लड़ाकू विमान
उन्होंने बताया कि चीन ने अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर समुद्री बेड़े में शामिल कर लिया है, लेकिन भारत भी अगले दो साल में कई नए लड़ाकू विमान प्राप्त करने वाला है. पिछले 5 साल में जितनी AON (Acceptance of Necessity) मिली है, उस हिसाब से हम पूरी तरह भरोसे में हैं कि जो जरूरत है, वो हम कर रहे हैं.
वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने यह बयान गुरुवार को दिल्ली में आयोजित ‘स्वावलंबन 2025’ कार्यक्रम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया. यह कार्यक्रम भारत में बनी तकनीक, स्टार्टअप और उद्योग जगत के नवाचारों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, ताकि नौसेना ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीकों पर निर्भर हो सके.
हिंद महासागर में विचरते रहते हैं 40-50 युद्धपोत
उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना लगातार इस पर भी नजर रख रही है कि पाकिस्तान को किन देशों से कौन-कौन सी तकनीक मिल रही है. जरूरत के अनुसार भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं का समीक्षा और विस्तार करती रहती है ताकि किसी भी चुनौती का सामना किया जा सके. वाइस एडमिरल के मुताबिक, हिंद महासागर में हर वक्त विभिन्न देशों के 40-50 युद्धपोत विचरण करते रहते हैं. ऐसे में किसी भी तरह के विपरीत हालात से निपटने के लिए भारतीय नौसेना भी पूरी तरह अलर्ट रहती है.
समंदर में स्वार्म बोट्स करेंगी दुश्मन का खात्मा
इस बार ‘स्वावलंबन 2025’ में स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री, एमएसएमई और तीनों सेनाएं एक साथ आएंगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इसमें शामिल होंगे. इस बार खास तौर पर छोटे-मध्यम उद्योगों को देसी सामान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
नौसेना ने पहले ही 12 स्वार्म बोट्स (झुंड में हमला करने वाली नावें) का ऑर्डर दे दिया है और कुल ₹1400 करोड़ के देसी ऑर्डर्स प्लेस किए हैं.आने वाले समय में हाई-पावर माइक्रोवेव वेपन्स, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स और लेजर हथियार भी विकसित हो रहे हैं.संक्षेप में कहें तो नौसेना का मैसेज साफ है – ‘दूसरे जो भी कर रहे हैं, हम उससे दो कदम आगे की तैयारी कर रहे हैं, वो भी पूरी तरह देसी तरीके से!’