राजस्थान भाजपा में राजनीतिक नियुक्तियों की हलचल तेज, बोर्ड-निगमों में जल्द होंगी बड़ी नियुक्तियां

जयपुर। राजस्थान भाजपा में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही कई बोर्ड, आयोग और समितियों में नियुक्तियां हो सकती हैं, जिसके लिए नामों पर चर्चा शुरू हो गई है।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों के चुनाव प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं की परफॉर्मेंस को ध्यान में रखते हुए अब उन्हें बोर्ड, निगम और आयोगों में जिम्मेदारियां देने की तैयारी की जा रही है।

प्रदेश भाजपा कार्यालय की ओर से वरिष्ठ नेताओं और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की जा रही है, जिसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से चर्चा के बाद केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने हाल ही के दौरों में राजनीतिक नियुक्तियों के संकेत दिए थे। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में होने वाले राष्ट्रीय नेतृत्व के दौरों के दौरान इस विषय पर अंतिम मंथन किया जा सकता है। पार्टी रणनीति के अनुसार राजनीतिक नियुक्तियों, मोर्चों और प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी गठन तथा मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया समानांतर या चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकती है।

भाजपा संगठन इस बार राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारी को भी मजबूत करना चाहता है। पार्टी का जोर उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर रहेगा, जो लंबे समय से संगठन की मूल विचारधारा से जुड़े रहे हैं। प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी संकेत दे चुके हैं कि नियुक्तियों में संगठन के पुराने और समर्पित चेहरों को प्राथमिकता मिल सकती है। इसके साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जाएगा ताकि सभी वर्गों और गुटों को प्रतिनिधित्व मिल सके।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कई वरिष्ठ नेता राजनीतिक नियुक्तियों की दौड़ में शामिल हैं। इनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा, सुमन शर्मा, लालचंद कटारिया, ज्योति खंडेलवाल, कुलदीप धनकड़, प्रभुदयाल सैनी, श्रवण सिंह बगड़ी, मुकेश दाधीच और लक्ष्मीकांत भारद्वाज जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा राजपाल सिंह शेखावत, डॉ. रामप्रताप, अभिषेक मटोरिया, कनकमल कटारा, मोहनलाल गुप्ता, निर्मल कुमावत, नारायण पंचारिया, सरदार अजयपाल सिंह, चंद्रकांता मेघवाल, संतोष अहलावत और रामहेत यादव के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।

इधर राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता राजनीतिक नियुक्तियों के बजाय राज्यसभा जाने की कोशिश में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने आयोग और बोर्ड में नियुक्ति लेने से फिलहाल इंकार भी किया है।

राजस्थान में महिला आयोग, बाल आयोग, ओबीसी आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, वक्फ बोर्ड, आरटीडीसी, राज्य खेल परिषद, समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड सहित कई संस्थानों में पद रिक्त हैं। इसके अलावा खादी बोर्ड, बीज निगम, आवासन मंडल, डांग विकास बोर्ड, मगरा विकास बोर्ड, हज कमेटी और जन अभाव अभियोग निराकरण समिति समेत कई बोर्ड और समितियों में नियुक्तियां लंबित हैं। पार्टी संगठन का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए सरकार और संगठन दोनों को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।