राजस्थान: डेढ़ लाख किसानों को काटने पड़ रहे 4 जिलों के चक्कर, जानिए आखिर क्या है ऐसी मजबूरी

ब्यावर (अजमेर)। केन्द्रीय सहकारी बैंक से संबंधित कार्यों के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख किसान सदस्यों को चार जिलों के चक्कर काटने पड रहे हैं। इनमें भीम उपखंड से टूटकर ब्यावर जिले में शामिल हुई बार उपतहसील क्षेत्र के लोगों को तो करीब 200 किलोमीटर दूर उदयपुर जाना पड रहा है। राजसमंद जिला मुख्यालय पर भी केन्द्रीय सहकारी बैंक नहीं है। ब्यावर में सहकारी संस्थाएं वर्ष 1957 से काम कर रही हैं। इसके बावजूद अब तक सीसीबी का गठन नहीं हो सका है।

ब्यावर के नया जिला बनने के बाद चार जिलों के क्षेत्र शामिल होने के बावजूद अब तक ब्यावर में सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (सीसीबी) शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में जिलेवासियों को सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के काम से उदयपुर, पाली, अजमेर एवं भीलवाडा जाना पड रहा है। ब्यावर जिला बनने के बाद पाली जिले के रायपुर व जैतारण, भीलवाडा जिले के बदनोर एवं राजसमंद जिले के भीम उपखंड की सात ग्राम पंचायतों को ब्यावर जिले में शामिल किया गया।

सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक शुरू नहीं होने से जैतारण व रायपुर वालों को पाली, ब्यावर, मसूदा व बिजयनगर वालों को अजमेर, भीम की सात ग्राम पंचायतों को उदयपुर एवं बदनोर वालों को भीलवाडा जाना पड रहा है। जबकि जिले की दृष्टि से इन सारे क्षेत्रों की ग्राम सेवा सहकारी समितियों व क्रय-विक्रय सहकारी समितियों का रिकॉर्ड ब्यावर सहकारी कार्यालय में आ चुका है। यहां से विधिवत काम शुरू हो गया है। सहकारी कार्यालय को अब तक संसाधन नहीं मिल सके हैं। वाहन नहीं मिलने से इनके प्रभावी देखरेख में भी परेशानी आ रही है।