जयपुर. राजस्थान की 16वीं विधानसभा का चौथा सत्र 1 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. इस बार का मॉनसून सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन इसके हंगामेदार रहने के संकेत पहले ही मिलने लगे हैं. सदन की शुरुआत से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने बहिष्कार कर माहौल गरमा दिया. बैठक विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में बुलाई गई थी, जिसमें सभी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था.
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग समेत सत्ता पक्ष के प्रमुख नेता शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई भी सदस्य बैठक में नहीं पहुंचा. विपक्ष के इस रुख ने साफ कर दिया कि सत्र के दौरान तीखे विवाद देखने को मिल सकते हैं.
विपक्ष का आरोप
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बैठक का बहिष्कार करने की वजह सोशल मीडिया पर साझा की. जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की मंशा शुरू से ही विधानसभा की कार्यवाही को सीमित रखने की रही है. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष लंबे सत्र के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि कम दिनों में सत्र खत्म कर दिया जाए ताकि सवाल-जवाब और जवाबदेही से बचा जा सके.
जूली ने सरकार पर एकतरफा रवैया अपनाने के भी आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जिलों में कांग्रेस नेताओं को चुन-चुनकर हटाया जा रहा है. पंचायत और छात्रसंघ चुनाव को टालने के लिए अदालतों में हलफनामे दाखिल किए जा रहे हैं. किसानों को डीएपी और खाद नहीं मिल रही, जबकि जयपुर में करोड़ों रुपये खर्च कर नया कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है.
सत्ता पक्ष का जवाब
वहीं, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया. गर्ग ने कहा कि सर्वदलीय बैठक की तारीख विपक्ष से सहमति लेकर तय की गई थी. जूली ने खुद 28 अगस्त को बैठक की तारीख तय करवाई थी, लेकिन आखिरी समय पर बहिष्कार का फैसला कर लिया गया. गर्ग ने कहा कि कांग्रेस आंतरिक कलह में उलझी हुई है और इस वजह से वे भाग रहे हैं. उन्होंने इसे लोकतांत्रि परंपरा का अपमान बताया और निंदा की.
हंगामेदार सत्र की आशंका
इतिहास गवाह है कि विधानसभा में सर्वदलीय बैठक की अनदेखी शायद ही कभी हुई हो. अब माना जा रहा है कि यह छोटा सत्र जितना छोटा होगा, उतना ही हंगामेदार भी रहेगा. कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि 2 सितंबर को होने वाली विधायक दल की बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. राजनीतिक माहौल गरम है और अब नजरें 1 सितंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है.
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