Hast Rekha Guru Shukra Parvat: हस्तरेखा शास्त्र में हथेली के पर्वतों का विशेष स्थान होता है. इनमें शुक्र पर्वत और गुरु पर्वत को सबसे शुभ माना गया है. कहा जाता है कि जिन व्यक्तियों के हाथ में ये पर्वत उभरे हुए और स्पष्ट दिखाई देते हैं, वे भाग्यशाली होते हैं. ऐसे लोग जीवन में सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं और उन पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है. हस्तरेखा शास्त्र में शुक्र और गुरु पर्वत के बीच की जगह को देवस्थान कहा गया है. यह स्थान जितना गहरा और स्पष्ट होता है, व्यक्ति का जीवन उतना ही शुभ और सफल माना जाता है. आइए जानते हैं शुक्र और गुरु पर्वत की स्थिति और उनसे जुड़ी विशेषताएं.
शुक्र पर्वत
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, मणिबंध (कलाई) के ऊपर और अंगूठे के ठीक नीचे का उभार शुक्र पर्वत कहलाता है. जिन व्यक्तियों के हाथ में शुक्र पर्वत पूर्ण विकसित और उभरा हुआ होता है, वे भौतिक सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण रहते हैं. साथ ही जीवन में धन की कमी नहीं होती. वैवाहिक जीवन सुखमय होता है. प्रेम संबंध और लव लाइफ संतोषजनक रहती है. जीवनसाथी से अच्छा सहयोग और साथ प्राप्त होता है.
गुरु पर्वत
हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक, हथेली में तर्जनी उंगली (पहली उंगली) के ठीक नीचे का भाग गुरु पर्वत कहलाता है. यदि यह पर्वत उभरा हुआ और साफ दिखाई दे, तो व्यक्ति को भाग्यशाली माना जाता है. लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता मिलती है. आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं. प्रबंधन, लेखन या सरकारी नौकरी जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं. ऐसे जातकों में धर्म-कर्म और आध्यात्मिकता की गहरी भावना होती है.