नई दिल्ली: धरती के ऊपर मंडरा रहे सैटेलाइट्स ने हाल ही में ऐसा नजारा कैद किया, जिसने साइंटिस्ट्स को भी हिला दिया. ओशन की लहरें यानी स्वेल्स, जिनकी औसत ऊंचाई करीब 20 मीटर रही. यानी पेरिस के मशहूर Arc de Triomphe जितनी ऊंची! ये अब तक की सबसे बड़ी लहरें हैं जिन्हें स्पेस से रिकॉर्ड किया गया है. रिसर्चर्स के मुताबिक, ये स्वेल्स केवल स्टॉर्म की ताकत नहीं दिखातीं, बल्कि वे ‘मैसेंजर’ की तरह काम करती हैं. यानी तूफान खत्म हो जाए, तब भी उसकी एनर्जी हजारों किलोमीटर दूर तक जाकर दूसरे कोस्टल एरिया को नुकसान पहुंचा सकती है. ESA और फ्रांस के लैब ऑफ फिजिकल एंड स्पेशल ओशेनोग्राफी की टीम ने डेटा मिलाकर पाया कि 2023-24 के स्टॉर्म्स अब तक के सबसे शक्तिशाली रहे. अब सवाल ये है कि क्या क्लाइमेट चेंज इन खतरनाक लहरों के पीछे की असली वजह है?
सबसे ऊंची लहरें! तूफान से भी ज्यादा खतरनाक
साइंटिस्ट्स ने पाया कि असली खतरा खुद तूफान से नहीं बल्कि उन लंबी स्वेल्स से होता है, जो तूफान के बाद भी ओशन में घूमती रहती हैं. ये लहरें हजारों किलोमीटर का सफर तय करती हैं. दिसंबर 2024 के Storm Eddie के दौरान SWOT सैटेलाइट ने ओपन ओशन में लगभग 20 मीटर ऊंची लहर रिकॉर्ड की. टीम ने इस स्वेल को 24,000 किलोमीटर तक ट्रैक किया, नॉर्थ पैसिफिक से लेकर ट्रॉपिकल अटलांटिक तक. ये पहली बार था जब किसी स्टॉर्म की एनर्जी को इतनी लंबी दूरी तक सैटेलाइट ने देखा.
फ्रांस के रिसर्चर फैब्रिस आर्धुइन की टीम ने पाया कि पहले जो मॉडल्स लहरों की एनर्जी का अनुमान लगाते थे, वे असल में ओवरएस्टिमेट कर रहे थे. नई सैटेलाइट डेटा से साफ हुआ कि लंबी स्वेल्स में उतनी एनर्जी नहीं होती जितनी पहले मानी जाती थी. असली एनर्जी तो डॉमिनेंट स्टॉर्म वेव्स में होती है. यानी वो लहरें जो सीधे तूफान के बीच बनती हैं. इसे ऐसे समझिए जैसे कोई बॉक्सर जो कमजोर पंचों की बजाय कुछ भारी घूंसे मारता है, कम मगर ज्यादा असरदार.
मॉडल्स के मुताबिक, पिछले 34 सालों में सबसे ऊंची लहरें जनवरी 2014 में आई थीं, जब Atlantic Storm Hercules ने 23 मीटर ऊंची वेव्स बनाईं. इनसे मोरक्को से लेकर आयरलैंड तक भारी तबाही हुई थी. अब SWOT, Jason-3, CryoSat और Copernicus Sentinel जैसी सैटेलाइट्स के डेटा से रिसर्चर्स वेव्स की पूरी जर्नी समझ पा रहे हैं. इससे न सिर्फ सी-लेवल राइज ट्रैक किया जा रहा है बल्कि कोस्टल कम्युनिटीज को बचाने के लिए रियल टाइम फोरकास्टिंग भी संभव हो रही है.
डॉ. आर्धुइन का कहना है कि अब अगला कदम है इन डेटा को क्लाइमेट चेंज से जोड़कर देखना. अगर ओशन्स गर्म हो रहे हैं तो स्टॉर्म्स और स्वेल्स की ताकत भी बढ़ सकती है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि सिर्फ क्लाइमेट चेंज ही वजह नहीं – सी-बेड की शेप और लोकल कंडीशन्स भी लहरों को प्रभावित करती हैं. ऐसे तूफान हर दस साल में एक बार आते हैं, इसलिए पैटर्न साबित करना मुश्किल है.