Meta AI Layoffs 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की रेस में दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी मेटा को बहुत बड़ा झटका लगा है. सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा ने एक झटके में अपने 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया था, साथ ही 7,000 लोगों को दूसरी टीमों से AI टीम में ट्रांसफर कर दिया था. अब कंपनी के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने इन बदलावों को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है. एक इंटरनल मीटिंग में जुकरबर्ग ने यह स्वीकार किया है कि AI को लेकर उनसे बहुत बड़ी कैलकुलेशन मिस्टेक यानी चूक हो गई है.
एक इंटरनल टाउन हॉल मीटिंग में जुकरबर्ग ने माना कि कंपनी के बड़े स्तर पर किए गए बदलावों के वैसे नतीजे नहीं मिले, जैसे उम्मीद की जा रही थी. जुकरबर्ग ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि मेटा के AI एजेंट्स उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाए, जितनी कंपनी ने उम्मीद की थी और शीर्ष अधिकारियों से इसकी टाइमिंग को लेकर गलत अंदाजा हो गया.
8,000 कर्मचारियों को निकाला, 7,000 को AI में लगाया
मेटा ने इस साल की शुरुआत में अपने खर्चों को कम करने और AI पर फोकस बढ़ाने के लिए करीब 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया था. मेटा में यह छंटनी कुल वर्कफोर्स का 10% थी. इसके साथ ही 7,000 कर्मचारियों को दूसरे विभागों से हटाकर AI टीमों में ट्रांसफर कर दिया गया था. कंपनी ने साल 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 145 अरब डॉलर यानी लगभग 12 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान बनाया है. लेकिन अचानक हुए इन बदलावों की वजह से कंपनी के कर्मचारियों का मनोबल पूरी तरह से टूट गया है.
AI की सुस्त रफ्तार पर जुकरबर्ग की चिंता
जुकरबर्ग ने मीटिंग में कहा कि बीते चार महीनों में AI एजेंट्स के विकास की रफ्तार वैसी नहीं रही, जैसी हमने सोची थी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि साल की शुरुआत में वे क्लाउड कोड जैसे AI टूल्स को लेकर काफी उत्साहित थे, लेकिन मेटा का यह दांव अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 3 से 6 महीनों में मेटा को अपने इस भारी-भरकम निवेश का फायदा दिखना शुरू हो जाएगा.
माउस-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर पर CTO की सफाई
मेटा के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एंड्रयू बोसवर्थ ने कंपनी के विवादित माउस-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर पर भी बात की. डेटा लीक की रिपोर्ट्स के बाद इस सॉफ्टवेयर को रोक दिया गया था. बोसवर्थ ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी कर्मचारी का पर्सनल डेटा AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर यह प्रोग्राम फिर से शुरू होता है, तो यह ऑप्ट-इन यानी कर्मचारियों की मर्जी पर निर्भर होगा. यानी जो कर्मचारी राजी नहीं होंगे, उन पर इसका दबाव नहीं बनाया जाएगा.
एप्लाइड AI डिवीजन को लागू करने का तरीका भी सही नहीं
इससे पहले, CTO बोसवर्थ ने एक इंटरनल मेमो में यह भी स्वीकार किया था कि कंपनी के नए एप्लाइड AI डिवीजन को बहुत ही खराब तरीके से लागू किया था. इस डिवीजन में 6,500 इंजीनियर्स और प्रोडक्ट मैनेजर्स को शामिल किया गया था, लेकिन मैनेजमेंट के खराब रवैए के कारण कर्मचारियों ने इस माहौल को बेहद तनावपूर्ण बताया.
अब कंपनी अपनी इस गलती को सुधारने की कोशिश कर रही है. बोसवर्थ ने वादा किया है कि कर्मचारियों का भरोसा जीतने के लिए कम्यूनिकेशन सुधारा जाएगा, मैनेजर्स के अंडर काम करने वाले लोगों की संख्या सीमित की जाएगी और ऑफिस में माइक्रो-किचन, ट्रैवल बजट और सोशल इवेंट्स जैसी सुविधाएं फिर से शुरू की जाएंगी जिससे ऑफिस का माहौल फिर से सही हो सके.