कानपुर. UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच हवा की दिशा तो बदली लेकिन उत्तर-पश्चिमी नहीं हुई। कहीं-कहीं बादलों के छंटने से तेज धूप खिली और तापमान बढ़ गया। चार नवंबर को महीने के पहले पश्चिमी विक्षोभ (डब्ल्यूडी) के आने की संभावना है। इसके बाद मैदानी इलाकों में सर्दी का अहसास बढ़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक पांच तक हल्के से मध्यम बादल छाए रहेंगे। अरब सागर के कम दबाव के क्षेत्र के बाद डिप्रेशन और फिर बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवाती तूफान मोंथा के कारण कानपुर में भी अच्छी बारिश हुई। आसमान साफ होते ही पारे ने फिर छलांग लगा दी।
मौसम विभाग के मुताबिक तीन से चार नवंबर तक पहला पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है। इससे पहाड़ों पर बारिश होगी। संभावना है कि इसके बाद से बर्फबारी शुरू हो जाएगी। यदि तब उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलती हैं तो मैदानी क्षेत्रों का मौसम एक बार फिर बदल सकता है। हल्की सर्दी की भी संभावना है। यदि नवंबर में डब्ल्यूडी आते रहेंगे तो आगे सर्दी की संभावना अधिक रहेगी। पहाड़ों की चादर से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं ही सर्दी लाती हैं। ये भी पढ़ें:बेमौसम बारिश के बीच CM योगी ने दौड़ाए अफसर, किसानों को राहत देने की तैयारी
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पांच नवंबर तक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। इससे कभी-कभी बूंदाबांदी भी हो सकती है। वैसे आसमान खुला रहेगा। दिन और रात के तापमान में वृद्धि होगी। तीन-चार को आने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर पड़ सकता है। पूर्व मध्य और उत्तर-पूर्वी अरब सागर में डिप्रेशन अभी भी सक्रिय है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक हल्के बादल बने रहने के कारण रात के तापमान में फिलहाल खास बदलाव की संभावना नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार नवंबर में तापमान सामान्य से अधिक बने रहने की संभावना है।
बारिश ने पूर्वी यूपी में तबाह की फसल मोंथा तूफान के असर से पिछले तीन दिन से हो रही लगातार बारिश और तेज हवाओं से गोरखपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धान की फसल तबाह हो गई है। मौसम ने किसानों का कमर ही तोड़ दी है। तेज हवा के साथ रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से खेत में खड़ी फसल तो बर्बाद हुई ही है, घर पहुंची फसल को भी नुकसान पहुंचा है। वह भी सड़ने के कागार पर हैं। वहीं अब सरसो, गेहूं और आलू की बुआई पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि चौथे दिन शनिवार को मोंथा का असर कम होने से बारिश न के बराबर हुई मगर खेतों में खड़ी धान की फसलें कई जगह गिरने से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। किसानों को हुए नुकसान को देखते हुए उप कृषि निदेशक धनंजय सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपने नुकसान की जानकारी निर्धारित समय सीमा या 72 घंटे में दर्ज कराएं। दरअसल, मंगलवार से शनिवार तक 30 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। जिन किसानों ने फसलें खेतों में सुखाने के लिए रखी थीं, वे भी अब सड़ने लगी हैं। मड़ाई के बाद घर पहुंचे धान न सूखने से सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
मौसम में बदलाव से बिजली की खपत में आई कमी कई दिनों से लगातार हो रही बारिश ने मौसम का पारा गिरा दिया है जिसकी वजह से बिजली की खपत में 150 एमवीए तक की कमी हुई है। हालांकि कुछ जगहों पर छोटे-छोटे फाल्ट जरुर हुए हैं लेकिन मौसम में ठंड की वजह से उपभोक्ताओं को खासी दिक्कत नहीं हुई। प्रचंड गर्मी के मौसम में बिजली निगम का लोड जिले में लगभग 700 से 800 एमवीए तक हो जाता है।
अतिवृष्टि से कई जगह धान की फसल प्रभावित पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश ने जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पानी भर जाने और कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी फसलों के भीगने से भारी नुकसान की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में उप कृषि निदेशक धनंजय सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपने नुकसान की जानकारी निर्धारित समय सीमा में दर्ज कराएं। जिले में हो रही अतिवृष्टि (अत्यधिक वर्षा) से खरीफ 2025 की फसलें प्रभावित हुई हैं। कई क्षेत्रों में खेत जलमग्न हैं।
बारिश से मिली राहत, दिन-रात का चढ़ा पारा तूफान मोंथा का प्रभाव कम होने लगा है। बीते 24 घंटे में केवल 2.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से कम है। बादलों के छंटने से दिन के तापमान में भी वृद्धि हुई है। शनिवार को गोरखपुर मेंं दिन का अधिकतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं शनिवार को रात का न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस रहा। शनिवार दोपहर से मौसम में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। आसमान साफ होने लगा है। इस वजह से आने वाले दिनों में धूप खिलने के साथ दिन के तापमान में वृद्धि होगी।