देहरादून। हरिद्वार कुंभ और संभावित चुनावी कार्यक्रम के टकराव की चर्चाओं के बीच भाजपा ने ऐसी किसी भी संभावना को ध्यान में रखकर अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी 2027 का इंतजार करने के बजाय 2026 के आखिरी महीनों को चुनावी डेडलाइन मानकर संगठन को सक्रिय करने में जुटी है।
मिल सकती है रणनीतिक बढ़त
भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है और उसे लगता है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल उसके पक्ष में है। भाजपा प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता, केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ, मजबूत संगठन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वीकार्यता पार्टी की बड़ी ताकत मानी जा रही है। भाजपा का मानना है कि विपक्ष अभी पूरी तरह तैयार नहीं है और समय पूर्व चुनाव की स्थिति में उसे रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
मुख्यमंत्री धामी भी भाजपा के सबसे बड़े चुनावी चेहरों में उभरकर सामने आए हैं। समान नागरिक संहिता, भू-कानून, नकल विरोधी-धर्मांतरण विरोधी कानून, डेमोग्राफी परिवर्तन पर सख्त रुख, महिला सशक्तीकरण और धार्मिक पर्यटन व बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे फैसलों ने सरकार की साख बढ़ाई है। पार्टी इन्हीं उपलब्धियों को चुनावी हथियार में बदलने की तैयारी कर रही है।
दूसरी ओर, भाजपा का संगठन पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुका है। सांसदों और मंत्रियों के प्रवास, बूथ समितियों के पुनर्गठन, लाभार्थी संपर्क अभियान और कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम संकेत दे रहे हैं कि पार्टी विपक्ष को तैयारी का अतिरिक्त समय नहीं देना चाहती। यदि चुनाव समय से पहले होते हैं तो भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत के सहारे विपक्ष को चुनावी चक्रव्यूह में घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।