पानीपत: हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद के बीच किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. फसल की तुलाई के समय लागू किए गए नए नियमों, खासकर ‘बायोमेट्रिक हाजिरी’ के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हजारों किसान सड़कों पर उतर आए हैं. पानीपत के डाहा टोल प्लाजा के पास रोहतक हाईवे पर किसानों ने चक्का जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस बल के बीच तीखी कहासुनी और धक्का-मुक्की भी हुई.
बायोमेट्रिक प्रणाली बनी जी का जंजाल
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा थोपी गई बायोमेट्रिक प्रणाली (अंगूठा लगाने की प्रक्रिया) व्यावहारिक नहीं है. किसानों ने निम्नलिखित मुख्य समस्याएं गिनाई हैं:
पोर्टल का सर्वर डाउन: किसानों का आरोप है कि पोर्टल अक्सर काम नहीं करता, जिससे मंडियों में घंटों इंतजार करना पड़ता है और लंबी लाइनें लग जाती हैं.
बुजुर्ग किसानों की परेशानी: 60-70 साल की उम्र के किसानों के लिए डिजिटल प्रक्रिया समझना और अंगूठे के निशान मैच करना बेहद कठिन है.
बीमार और लाचार किसान: यदि किसान अस्पताल में भर्ती है या घर पर बीमार है, तो भी उसे अंगूठा लगाने के लिए मंडी आना पड़ रहा है, जो अमानवीय है.
खेत में काम या मंडी में हाजिरी?: किसान का कहना है कि कटाई के पीक सीजन में वह खेतों में काम करे या मंडी में बायोमेट्रिक के लिए चक्कर काटे.
मंडियों को खत्म करने की साजिश का आरोप
किसानों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये कड़े नियम जानबूझकर बनाए गए हैं ताकि किसान सरकारी मंडियों से परेशान होकर निजी सिलो (Silo) गोदामों की ओर रुख करें. किसानों का कहना है कि सरकार मंडियों को खत्म कर अडानी-अंबानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचाना चाहती है. किसानों ने चेतावनी दी कि अगर मंडियां बंद हुईं, तो छोटा किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा.