मंडी: हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के गोहर उपमंडल में पीलिया रोग यानी जॉन्डिस का प्रकोप लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है. बासा पंचायत के दाड़ी क्षेत्र के गांव लेओटी के रहने वाले एक 28 वर्षीय युवक की पीजीआई चंडीगढ़ में उपचार के दौरान मौत हो जाने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. इस साल पीलिया से हुई इस पहली मौत के बाद लोगों में दहशत का माहौल है. मृतक के पिता दीपक शर्मा ने उनके बेटे की पीलिया से मौत होने की पुष्टि की है.
मंडी में पीलिया से युवक की मौत
स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक उदित शर्मा बीटेक पास था और घर पर रहकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. उदित के असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. ग्रामीणों के मुताबिक, गांव लेओटी निवासी दीपक शर्मा की 29 वर्षीय बेटी जिज्ञासा सबसे पहले पीलिया की चपेट में आई थी. करीब 2 सप्ताह पहले उसका उपचार गोहर सिविल अस्पताल में हुआ और वह स्वस्थ हो गई थी. लेकिन, करीब पांच दिन पहले उसके भाई उदित शर्मा को भी पीलिया हो गया. तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे गोहर सिविल अस्पताल लाए, जहां से उसे एम्स बिलासपुर रेफर किया गया. एम्स बिलासपुर में भी हालत गंभीर बनी रहने पर चिकित्सकों ने युवक को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया, जहां शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
गोहर सिविल अस्पताल में लगातार आ रहे मामले
जनवरी 2026 में अब तक गोहर सिविल अस्पताल में पीलिया के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रोजाना 4 से 5 नए मरीज पीलिया के लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं. इनमें कुछ मरीज उपचाराधीन हैं, जबकि कई मरीजों को हालत में सुधार के बाद छुट्टी दी गई है. चैलचौक, गणई, कुठेहड़, नौण, चच्योट, गोहर, बस्सी और स्यांज क्षेत्रों में पीलिया का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इन इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जांच और इलाज के लिए गोहर सिविल अस्पताल पहुंच रहे हैं. पीलिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन ने लोगों से उबला हुआ पानी पीने, स्वच्छता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर फौरन जांच करवाने की अपील की है.
पीलिया फैलने के कारण
सिरमौर जिले की वरिष्ठ डॉक्टर मोनिशा अग्रवाल ने बताया कि, “पीलिया के फैलने के कई कारण होते हैं. जैसे एडल्ट्स में यदि कोई ज्यादा शराब का सेवन करता है, तो उसमें पहला लक्षण जॉन्डिस यानी पीलिया ही होता है. शराब के अधिक सेवन करने से पीलिया का खतरा अधिक बढ़ जाता है. जब भी लीवर में कोई खराबी आएगी या गॉल ब्लैडर में कोई स्टोन डक में स्टक कर देगा, तब भी पीलिया होने का खतरा रहता है.”
पीलिया होने पर बरतें ये सावधानी?
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न खाएं.
लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा है और किसी को पीलिया हो गया है, तो फौरन चेकअप के लिए अस्पताल जाएं.
पीलिया के लक्षण
पीलिया रोग होने पर मरीज को बहुत अधिक थकावट महसूस होती है.
चलने-फिरने और काम करने में भी मरीज को काफी दिक्कत होती है.
पीलिया होने 4-5 दिन के बाद हाथों, नाखून और आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगता है.
पीलिया में बुखार की शिकायत अधिक नहीं रहती. व्यक्ति को थकावट के साथ-साथ चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है.
अस्पताल में पीलिया मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड
वहीं, खंड स्वास्थ्य अधिकारी बगस्याड़, डॉ. राकेश रोशन भारद्वाज ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि, “क्षेत्र में पीलिया के कुल 42 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 17 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोहर अस्पताल में पीलिया मरीजों के लिए एक स्पेशल वार्ड बनाया गया है, जिसमें 3 मरीज भर्ती हैं. स्वास्थ्य विभाग ने गोहर और बासा पंचायतों में घर-घर जाकर मरीजों की पहचान करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों और आशा वर्करों की एक टीम गठित की गई है.”