Air Pollution In MP: मध्यप्रदेश में पानी के बाद अब हवाओं में भी जहर घुलता नजर आ रहा है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राजधानी भोपाल और इंदौर सहित 8 शहरों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता जताई है. NGT ने इसे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताते हुए राज्य सरकार को 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
NGT की सेंट्रल जोन की भोपाल बैंच ने माना है कि भोपाल में वायु गुणवत्ता निर्धारित मानकों के कहीं अधिक खराब स्थिति में पहुंच चुकी है. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में ‘बहुत खराब’ से लेकर ‘गंभीर’ श्रेणी तक दर्ज किया गया है. NGT ने 7 जनवरी को जारी अपने आदेश में इस स्थिति को पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बताया है.
याचिकाकर्ता के आवेदन पर NGT ने की सुनवाई
याचिकाकर्ता राशिद नूर खान के आवेदन पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल बेंच में जस्टिस शेव कुमार सिंह ने आदेश जारी किया. NGT ने अपने आदेश में कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर सिंगरौली को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने ‘नॉन अटेनमेंट सिटी’ के रूप में घोषित किया है. इन सभी शहरों में पिछले पांच वर्षों से PM₁₀ और PM₂.₅ के स्तर वायु गुणवत्ता मानकों से लगातार ऊपर बने हुए हैं. इस स्थिति को पार्यवरण और आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया गया ह.
राजधानी भोपाल की हवा बेहद खराब
विशेष रूप से झीलों की नगर भोपाल में PM₁₀ का वार्षिक औसक 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया है, जबकि PM₂.₅ का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है. ये आंकड़े निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक हैं.
दिल्ली-एनसीआर मॉडल अपनाने की कही बात
NGT ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली-एनसीआर के लिए लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और एयर-शेड आधारित नीतियों के बावजूद मध्यप्रदेश में अभी तक कोई प्रभावी राज्यस्तरीय तंत्र नहीं बनाया गया है. एनजीटी के अनुसार इसी वजह से प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या और गंभीर रूप ले रही है.
ज्वॉइंट कमेटी का गठन
मामले की गंभीर को देखते हुए NGT ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है. साथ ही एक ज्वॉइंट कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, इप्को के प्रतिनिधि, नगरीक प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य और सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त निदेशक रविप्रकाश मिश्रा शामिल हैं. इस समिति के उद्देश्य वायु गुणवत्ता सुधार के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना है और लागू करना है.
18 मार्च को होगी अगली सुनवाई
NGT ने समिति को निर्देश दिया है कि वह 6 सप्ताह के भीतर वर्तमान स्थिति का विस्तृत आंकलन करे और अब तक की गई कार्रवाइयों सहित तथ्थात्मक रिपोर्ट पेश करें. एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस प्रक्रिया की नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है. इस मामले कि अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी.