Red Fort Story: पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला इन दिनों दुनियाभर के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है. गूगल में अगर आप लाल किला लिखकर सर्च करें तो दिल दहला देने वाली धमाके की तस्वीरें और खबरें खुल जाती हैं. 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास आंतकी हमला हुआ. आत्मघाती हमले में कार सवार आंतकी ने धमाका कर खौफ और दशहत फैला दिया. अब तक की जानकारी के मुताबिक इस हमले में 10 से ज्यादा मासूम जिंदगियां दम तोड़ चुकी हैं और दर्जनों घरों को कभी न भूल पाने वाला गम मिल गया है. ये धमाका उसी लाल किले के पास हुआ, जहां से पहली बार पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारत की आजादी की घोषणा की थी. आज कहानी उसी लाल किले की…
किसने और क्यों बनवाया लाल किला
मुगल बादशाह शाहजहां आगरा के बजाए दिल्ली को अपनी राजधानी बनाना चाहते थे. राजधानी के लिए एक खास महल की जरूरत थी,इसलिए उन्होंने 1638 में लाल किले का निर्माण शुरू करवाया. ये किला इतना बड़ा है कि इसे बनाने में 10 साल लग गए. 250 एकड़ में बना ये किला मुगलों की आलीशान वास्तुकला का प्रतीक है. यमुना नदी कि किनारे बने इस किले को चारो ओर से 33 मीटर ऊंची चारजीवारी से घेरा गया है. वैसे तो लाल किले में छह मुख्य द्वार है, लेकिन प्रवेश लाहौरी द्वार से होती है.
चीन के रेशम और टर्की के मखमल की सजावट
मुगल शासक शाहजहां ने लाल किले के निर्माण के बाद साल 1647 में इसके उद्घाटन के लिए खास सजावट करवाई. महल के मुख्य कक्ष भारी पर्दों से सजाए गए और चीन के रेशम और टर्की के मखमल से इसकी सजावट की गई. लाल किले के अंदर दर्जनों छोटे-छोटे महल और इमारतें हैं. जिनमें दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, मोती मस्जिद, हीरा महल, रंग महल, खास महल और हयात बख्श बाग बेहद खास है.
किसने बनाया लाल किला, कितने हैं कमरे
लाल किले का निर्माण उस्ताद अहमद और उस्ताद हामिद ने किया था. लाल किले के अंदर महलों की कतारें हैं. संगमरमर से बना मुमताज महल मगल बादशाह के दिल के बेहद करीब था. इस महल में 6 कमरे और तहखाने हैं. कमरे में संगमरमर की कुर्सियां हैं. यहां शीश महल है.दीवारों पर छोटे-छोटे शीशे जड़े हैं, महल में 200 से ज्यादा कमरे हैं, जिनमें से दीवान-ए-खास में 50 कमरे, दीवान-ए-आम में 20 कमरे और शाही निवास में लगभग 80 कमरे हैं.
1 करोड़ का आया था खर्च
लाल किले को बनाने में उस वक्त यानी 1638-48 में 1 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आया था. आज के समय में वह अरबों-खरबों में पहुंच जाएगा. लाल किला जो आज लाल रंग का दिख रहा है, पहले लाल नहीं था. पहले इस लाल किले का रंग सफेद हुआ करता था, लेकिम 19वीं सदी में अंग्रेजों ने मरम्मत के दौरान इसका रंग सफेद से बदलकर लाल कर दिया.
लाल किले का मयूर सिंहासन
रंग के साथ-साथ इसका नाम भी बदल गया. लाल किल किले का पुराना नाम ‘किला-ए-मुबारक’ था, बाद में यह लाल किले के नाम से मशहूर हो गया. लाल किले में शाहजहां से खास सिंहासन बनाया था, जिसे मयूर सिंहासन का नाम दिया गया.इस तख़्त-ए-ताऊस भी कहा गया. करीब 1150 किलो सोना, 230 किलो बेशकीमती पत्थर से बने इस सिंहासन को दिवान-ए-खास में रखा गया था. उस दौर में दुनिया का सबसे मंहगा सिंहासन था.माना जाता है कि कोहिनूर हीरा (Kohinoor Diamond) भी इसी का हिस्सा था. मशहूर विदेशी यात्री ट्रैवर्नियर ने 1665 में इसकी कीमत करीब 10 करोड़, 70 लाख रुपये बताई थी.
इसी किले में रखा था कोहिनूर हीरा
मुगलों के पतन के बाद साल 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने इस किले में आर्मी हेड क्वार्टर बना लिया था. अंग्रेज यहां रखे सभी कीमती सामानों को लूटकर ले गए. भारत के अलग-अलग हिस्सों से अंग्रेज कीमती सामान लूटकर यहां लाते और फिर ब्रिटेन भेजा करते थे. इस दौरान दुनिया का सबसे बड़ा कोहिनूर हीरा भी लाल किले में ही रखा गया था. लाल किले में शाहजहां के लिए बना सिंहासन सोने से तैयार किया गया था, जिसपर हीरे और बेशकीमती पत्थर लगे थे. कोहिनूर लगा इस सिंघासन दीवान-ए-खास की पहचान थी.