नौकरी गई तेल लेने! एलन मस्क ने कहा – “AI-रोबोट सब संभाल लेंगे, 20 साल बाद बदल जाएगा सबकुछ”

जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामत ने हाल ही अपने पॉडकास्ट People by WTF में SpaceX के फाउंडर और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क के साथ खास बातचीत की. इस बातचीत में एलन मस्क ने स्टारलिंक से लेकर लेटर X तक पर भी खुलकर बात की. एलन मस्क ने अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक के बारे में भी इस पॉडकास्ट में बताया है.

इस पॉडकास्ट में निखिल कामत ने एलन मस्क से पूछा कि क्या भविष्य में “काम करना ऑप्शनल” होगा? एलन मस्क ने इसपर जवाब देते हुए कहा कि “मेरी भविष्यवाणी 20 साल से कम में ही काम ‘ऑप्शनल’ हो सकता है; एआई और रोबोटिक्स इतना प्रोडक्शन बढ़ा देंगे कि लोग जरूरी नहीं कि रोज़ काम करें.” एलन मस्क ने ये भी कहा कि ये एक संभावना है. ये तभी सच होगा जब तकनीक बहुत तेज़ चले, सरकारें सही नीतियां बनाएं, समाज और अर्थव्यवस्था तैयार हो और बिजली-पानी-कच्चा माल जैसी चीज़ें आसानी से मिलती रहें. अगर इनमें से कोई एक भी चीज अटक गई तो ये सपना देर से पूरा होगा या शायद बदलेगा भी.

UBI और UHI में फर्क
UBI यानी यूनिवर्सल बेसिक इनकम – सरकार हर महीने हर आदमी को थोड़े पैसे देगी ताकि गुज़ारा चल जाए.लेकिन एलन मस्क ने बताया कि उन्हें को UHI ज्यादा पसंद है – यूनिवर्सल हाई इनकम. मतलब प्रोडक्शन इतना ज़्यादा और सस्ता हो जाएगा कि हर किसी की ज़िंदगी अमीरों जैसी हो जाएगी. खाना, कपड़ा, मकान, घूमना-फिरना सब इतना सस्ता और भरपूर कि नौकरी करना सिर्फ़ शौक रह जाएगा, जैसे कोई पेंटिंग करता है या गाना गाता है. काम ज़रूरी नहीं, मन चाहे तो करें.

अगर एलन मस्क की ये बात सच हो जाती है. एक दिन काम करना सच में ऑप्शनल हो गया तो समाज और अर्थव्यवस्था में बड़ा उलट-फेर आएगा. लोग अपनी पहचान तब नौकरी से नहीं, बल्कि क्रिएटिविटी, पढ़ाई-लिखाई, कला, साइंस रिसर्च या समाज-सेवा से जोड़ेंगे.अच्छी बात ये कि हर किसी को अपना पैशन फॉलो करने का मौका मिलेगा. लेकिन मुश्किलें भी कम नहीं – बेरोजगारी का शुरुआती झटका, लोगों को नई स्किल सिखाना, मानसिक तनाव और अमीरी-गरीबी का गैप कंट्रोल करना, ये सब बड़ी चुनौती होगी.

उद्यमियों और बिजनेस वालों के लिए एलन मस्क की साफ सलाह है – अगले 10-20 साल बहुत कीमती हैं. जो लोग अभी से एआई और ऑटोमेशन को अपना हथियार बनाएंगे, वही सबसे आगे रहेंगे. मतलब अपना बिजनेस ऐसा बनाना होगा कि ज्यादातर काम मशीनें करें, खर्चा कम हो और प्रोडक्शन ज्यादा हो. क्योंकि भविष्य में पैसा इन्हीं चीजों से बनेगा. एलन की उम्मीद है कि तकनीक सब बदल देगी, लेकिन इसके लिए सरकार की सही पॉलिसी और लोगों को जानकारी होना भी जरूरी है.

एलन उम्मीद करते हैं कि तकनीक के कारण काम का स्वरूप बदल जाएगा; पर पॉलिसी, आर्थिक मॉडल और मानवीय एडेप्टेशन जरूरी होंगे. निखिल कामत ने ये भी पूछा कि अगर सबको पर्याप्त मिले तो प्रतिस्पर्धा किस बात की होगी?
एलन ने बताया कि इससे संसाधनों की मार्जिनल यूटिलिटी घटती है.फिर भी इंसान रिलेटिव चीज़ों के लिए प्रतिस्पर्धा करेगा जैसे लाइफ स्टेट्स, मीनिंग आदि.
मल्ज़रल यूटिलिटी का मतलब है कि कि किसी वस्तु का हर अतिरिक्त यूनिट कम यूज हो जाती है. अगर किसी वस्तु की आपूर्ति असीमित हो जाए (post-scarcity), उसकी वैल्यू गिर जाएगी. फिर लोग उसका कॉम्पिटेटिव महत्व कम समझेंगे.

लोगों के बीच इन चीजों के लिए बढ़ेगा कॉम्टिशन
जब खाना-कपड़ा-मकान सब सस्ता और भरपूर मिलने लगेगा तो लोग पैसों के लिए नहीं लड़ेंगे, लेकिन कंपटीशन खत्म नहीं होगा. एलन मस्क का मानना है कि तब लोगों का गोल बस शिफ्ट हो जाएगा. लोग अब स्टेटस दिखाने वाली दुर्लभ चीजों के लिए भागेंगे – जैसे कोई यूनिक ट्रिप, हाथ से बना खास आर्ट, दुनिया में सिर्फ एक ही वाला सामान, या बीच पर सबसे बेहतरीन प्राइवेट विला. नाम, रुतबा, फॉलोअर्स, इन्फ्लुएंस और लोगों की तारीफ के लिए भी खूब होड़ मचेगी क्योंकि ये चीजें हमेशा “दूसरों से बेहतर” वाली होती हैं. इसके अलावा लोग अपना मतलब ढूंढने के लिए क्रिएटिविटी, मास्टरी और समाज पर अच्छा असर डालने में कंपटीशन करेंगे. लाइव कॉन्सर्ट जाना, किसी बड़े इंसान से पर्सनल मेंटरशिप लेना या असली इंसान से दिल की बात करना – ये सब हमेशा कम ही रहेंगी, इसलिए इनके लिए भी लाइन लगेगी. उद्यमियों के लिए ये सुनहरा मौका है. भविष्य में जो बिजनेस चलेगा वो लोगों को स्टेटस, अपनी अलग पहचान या ऐसा अनुभव जो कोई और न दे सके. या फिर ऐसा प्लेटफॉर्म बनाओ जो लोगों की क्रिएटिविटी को उड़ान दे, उन्हें अपना बेस्ट वर्जन बनने में मदद करेगा.