टोक्यो की गलियों में उस वक्त एक नया इतिहास लिखा जा रहा था, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री इशिबा साथ-साथ दुनिया की दिग्गज टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री (Tokyo Electron Limited – TEL) पहुंचे. यहां दोनों नेताओं ने ट्रेनिंग रूम से लेकर प्रोडक्शन इनोवेशन लैब तक का दौरा किया और कंपनी के टॉप अधिकारियों से बातचीत की. इस दौरान पीएम मोदी ने ट्वीट कर साफ किया कि आने वाले समय में भारत-जापान की दोस्ती सेमीकंडक्टर सेक्टर में नई ऊंचाइयां छुएगी और लाखों युवाओं के लिए रोजगार और इनोवेशन के अवसर लेकर आएगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में कई अहम कदम उठाए हैं. यह ऐसा सेक्टर है, जो भविष्य की तकनीक का मूल है, चाहे वह मोबाइल फोन हों, लैपटॉप, कारें या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया. भारत-जापान की यह साझेदारी अब इस दिशा में गेम-चेंजर साबित हो सकती है.
टोक्यो इलेक्ट्रॉन लिमिटेड का इतिहास
दरअसल, टोक्यो इलेक्ट्रॉन लिमिटेड (TEL) एक ग्लोबल सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जिसकी स्थापना 1963 में हुई थी. अमेरिका, यूरोप और एशिया तक अपनी सेवाएं देने वाली यह कंपनी अब भारत में भी कदम बढ़ाने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, TEL भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग उपस्थिति स्थापित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है.
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साइन हुआ एमओयू
याद दिला दें कि पिछले साल सितंबर में TEL ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया था. इस समझौते के तहत TEL ने गुजरात के धोलेरा में बन रहे सेमीकंडक्टर फैब प्रोजेक्ट और असम के जगिरोड़ में एसेंबली व टेस्टिंग फैसिलिटी को तेजी से आगे बढ़ाने में सहयोग देने की सहमति जताई थी.
सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूती
भारत सरकार भी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने में जुटी है. बढ़ती ग्लोबल मांग, फास्ट प्रोसेसर और एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए सक्षम चिप्स के चलते यह सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जापान और भारत मिलकर इस दिशा में काम करते हैं तो न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि भारत का घरेलू टेक इकोसिस्टम भी मजबूत होगा.