US Iran War Reason: अमेरिका ने ईरान पर हमला कर मिडिल ईस्ट में नई जंग की शुरुआत दी है. इजरायल के कंधे पर बंदूक रखकर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर मिसाइलें दागीं. इस जंग में अब दर्जनों देश शामिल हो गए हैं. ट्रंप भले ही इसे न्यूक्लियर हथियार के साथ जोड़ रहे हो, लेकिन अगर थोड़ा पीछे चले तो हमले का असली मकसद साफ दिखने लगेगा. ईरान और वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले के बीच तार जुड़ने लगेंगे. 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपने कब्जे में ले लिया. ट्रंप जो खुद को शांति दूत कहने से नहीं थकते, उन्होंने बीते दो महीनों में दो बड़े हमले कर नई जंग की शुरुआत कर दी. पहले वेनेजुएला और अब ट्रंप के निशाने पर ईरान है. ट्रंप राष्ट्रपति से ज्यादा एक बिजनेसमैन के तौर पर सोचते हैं. टैरिफ के मामले में पूरी दुनिया ने ट्रंप का कारोबारी रूप देखा है. अब जंग के बहाने भी वो उद्योगपति के तौर पर अपने देश की ताकत बढ़ाने में जुटे हैं. अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप राजनीतिक और कूटनीतिक से ऊपर फैसलों को आर्थिक चश्मे से देख रहे हैं. ईरान पर किए गए हमले इस बात की ओर ही इशारा कर रहे हैं.
ईरान हमले में छिपा ट्रंप का ‘हिडेन’ प्लान
इजरायल चाहता है कि ईरान कभी परमाणु बम न बना पाए और अमेरिका चाहता है कि इस इलाके पर उसका कब्जा हो. ईरान पर कंट्रोल का मतलब है मिडिल ईस्ट पर दबदबा कायम करना. ईरान के पास 208,600,000,000 बैरल कच्चे तेल का भंडार है. ग्लोबल ऑयल प्रोडक्शन में ईरान की हिस्सेदारी 11.45 फीसदी की है. हर दिन यह देश 3.3 मिलियन बैरल तेल का प्रोडक्शन करता है. सिर्फ तेल ही नहीं ईरान नेचुरल गैस का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है. हर साल वह 276 अरब घन मीटर गैस का उत्पादन करता है. ये तो वो जानकारी है, जो अधिकांश लोग जानते हैं, जिसपर अमेरिका की नजर है.
ईरान के पास छिपा है ये खजाना
तेल और गैस के अलावा ईरान के पास रेयर अर्थ मिनरल्स का भंडार है. ईरान से निकलने वाला तांबा घरेलू उद्योग के साथ-साथ निर्यात का भी बड़ा जरिया है. लौह अयस्क, इसके उत्तर-पश्चिमी इलाकों में अरासबारन और जारशौरान के खदानों में सोने-चांदी के भंडार, जिंक, सीसा ईरान की इकोनॉमी को मजबूती देते हैं. ईरान का यूरेनियम भंडार,उसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाता है. ईरान में लिथियम, फास्फेट, एल्युमीनियम, कोयला, फ्लोरस्पार, फेल्डस्पार, बैराइट्स और जिप्सम जैसे खनिज दुर्लभ खनिज पाए जाते हैं.
ईरान और वेनेजुएला पर हमला के कनेक्शन समझिए
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार करीब 303 बिलियन बैरल वेनेजुएला के पास है. इस तेल पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा था, ईरान के तेल निर्यात पर भी अमेरिकी प्रतिबंध है. ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर हमला कर उसके तेल को अपने कब्जे में लिया और अब वो ईरान के साथ भी यही खेल खेल रहे हैं. ईरान पर हमला कर उसके तेल को अमेरिका के अधिकार में लेना चाहता हैं, कच्चे तेल के दो बड़े भंडार अमेरिका के ऑयल रिजर्व भंडार को ताकत देंगे. जिस देश के पास जितना तेल वो उतना ताकतवर. तेल पर कंट्रोल हासिल कर वो ग्लोबल ऑयल मार्केट और ग्लोबल इकोनॉमी को अपने इशारों पर नचाएंगे.
सिर्फ तेल नहीं ट्रंप की नजर समंदर पर
ईरान पर हमले के पीछे ट्रंप की मंशा सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है. ट्रंप की नजर समंदर के उस रास्ते पर कब्जा करना है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी कारोबार होता है. ईरान पर कब्जे के साथ वो होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz पर अपना अधिकार जमा सकेंगे. इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अधिकार का मतलब ग्लोबल ट्रेड पर कंट्रोल हासिल करने जैसा है. इसी संकरे रास्ते से ओपेक देश यानी सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुलैत, इराक जैसे देश अपना कच्चा तेल निर्यात करते हैं. हर दिन इस रास्ते से 20 मिलियन बैरल तेल होकर गुजरता है. दुनिया की एक तिहाई एलएनजी का निर्यात होता है. इस रास्ते पर कब्जे से वो मिडिल ईस्ट पर कंट्रोल का रिमोट हासिल कर लेंगे. इस होर्मुज का महत्व इतना ही है कि अगर इस रास्ते को बंद कर दिया जाए तो कच्चे तेल की कीमतें 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. कानूनी तौर पर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से पर नियंत्रित करता है. इसी का फायदा उठाकर ईरान ने इजरायल के हमले के बाद बंद कर दिया है.