अप्रैल में जो नहीं हुआ, वो जुलाई में होगा! लोकसभा में 2/3 बहुमत पाने के लिए क्या है NDA की रणनीति?

पश्चिम बंगाल में आए चुनावी नजीतों के बाद कोलकाता से दिल्ली तक हलचल देखने को मिल रही है. तृणमूल कांग्रेस में टूट की खबरों के बीच इस बात का दावा किया जाने लगा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार मानसून सत्र में एक बार फिर से परिसीमन विधेयक को संसद की पटल पर रख सकती है. इससे पहले बजट सत्र के दौरान दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लोकसभा में गिर गया था.

दरअसल, जुलाई के आखिरी हफ्ते में मानसून सत्र के शुरू होने की संभावना है. बता दें कि संविधान का 131वां संशोधन विधेयक, 2026 बजट सत्र में पास नहीं हो सका था, क्योंकि इसे पारित होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया. इस विधेयक का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर चुनावी सीमाओं को फिर से निर्धारित करना था. लोकसभा में वर्तमान में एनडीए के पास बहुमत का आंकड़ा है, जो दो-तिहाई से काफी कम है.

टीएमसी के बागियों से एनडीए को उम्मीद?
इससे पहले सोमवार (09 जून) को टीएमस की सांसद काकोली घोषण दस्तीदार ने एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि उन्हें 20 टीएमसी सांसदों का समर्थन प्राप्त है. कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक बताया गया कि ममता बनर्जी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है. हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. चूंकि, लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद है, ऐसे में अगर इनमें से 20 बगावती रुख अपनाते हैं, तो यह दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार पार्टी को विभाजित करने के लिए आवश्यक संख्या से एक अधिक है.

टीएमसी के बागी साथ आए, तो क्या होगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बागी टीएमसी सांसद एक नया गुट बनाने की तैयारी में हैं और वह एनडीए सरकार को समर्थन देने की योजना पर काम कर रहे हैं. अगर वह ऐसा करते हैं, तो लोकसभा में एनडीए सीटों की संख्या पहली बार 300 के पार जाएगी. साल 2024 में हुए आम चुनाव में एनडीए के खाते में 293 सीटें आई थीं.

इतना ही नहीं, हाल में ही तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके को मिली करारी शिकस्त के बाद उसकी सहयोगी कांग्रेस ने साथ छोड़ा दिया. ऐसे में माना जा रहा है कि लोकसभा में डीएमके से सशर्त समर्थन हासिल करने के लिए भी बातचीत चल रही है. अगर यह सही साबित होता है, तो इससे एनडीए दो-तिहाई बहुमत के और भी करीब पहुंच जाएगा. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता की ओर से कहा गया कि मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी सरकार की ओर से की जा रही है.

इन विधेयकों को पेश करने की तैयारी में सरकार
बताया जा रहा है कि जिन विधेयकों को पेश करने की तैयारी की जा रही है, उनमें 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के लिए आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक, ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बिल शामिल हैं. हालांकि, इन विधेयकों को पारित कराने से पहले एनडीए को संसद की दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा करना होगा. बता दें कि इसी साल अप्रैल में बजट सत्र के दौरान दो-तिहाई बहुमत ना होने के कारण 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका था.

क्या डीएमके के सांसद देंगे लोकसभा में साथ?
गौरतलब है कि हाल में ही देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसके बाद एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है. सूत्रों की मानें, तो तमिलनाडु में डीएमके की हार के बाद और सहयोगी कांग्रेस के संबंध तोड़ने के बाद 22 सांसद कुछ मुद्दों पर एनडीए का समर्थन कर सकते हैं. आने वाले दिनों में ऐसा देखने को मिल सकता है.

संसद में संख्याबल का गणित समझिए
टीएमसी के बागी सांसदों के समर्थन की बात वास्तव में अप्रत्याशित है, लेकिन एनडीए की आगामी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण भी है. ऐसे में अगर संख्यात्मक बल के तौर पर समझें, तो 543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है. फिलहाल बसीरहाट, शिलांग और नौगोंग लोकसभा सीटें रिक्त हैं. ये सभी सीटें मौजूदा सांसदों की मृत्यु के कारण रिक्त हुई हैं. इसके बाद अब लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए एनडीए को 360 सांसदों की जरूरत है.

पहले से ही एनडीए के पास 293 सांसद मौजूद हैं. अगर टीएमसी बागी गुट एनडीए के समर्थन में आता है, तो यह आंकड़ा बढ़कर 313 हो जाएगा. वहीं, अगर डीएमके के 22 सांसद सशर्त समर्थन देते हैं, तो संख्या 335 पहुंचती है. इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बीजेपी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसदों पर भी नजर रखे हुए है. अगर यह टूटते हैं और 6 सांसद एनडीए के समर्थन में आते हैं, तो यह संख्या 341 पहुंचती है.

कहां फसेगा पेच?
गौर करने वाली बात है कि अप्रैल के महीने में लोकसभा में सरकार की ओर से लाए गए विधेयक को 298 सांसदों का समर्थन मिला था, इसका सीधा अर्थ है कि एनडीए को कुछ अन्य सांसदों का समर्थन मिला. अगर वह फिर से साथ आते हैं, तो एनडीए संभावित सीटें 348 तक पहुंच सकती हैं. यह लोकसभा में दो-तिहाई से केवल 12 सीटें कम है. सरकार उम्मीद जता रही है कि कुछ स्वतंत्र सांसद और छोटे दल इस अंतर को पाट सकती है.

अप्रैल में क्या हुआ था?
गौरतलब है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी. ऐसे में सदन के कुल सदस्यों में से कम से कम आधे सदस्यों का उपस्थित होना अनिवार्य है. वहीं, यह विधेयक तभी पारित हो सकता है, जब उपस्थित और मतदान करने वालों के दो-तिहाई बहुमत प्राप्त हो जाएंगे.

अप्रैल में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए हुए मतदान के दौरान लोकसभा में 528 सांसद उपस्थित थे, जिससे दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी. विधेयक के पक्ष में 298 वोट मिले और इसके विरोध में 230 वोट मिले थे. ऐसे में करीब 54 वोटों से यह विधेयक गिर गया था. हालांकि, अब सरकार ने इस अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है.