यूपी: फर्जी केस और झूठी जानकारी देने वालों पर पुलिस अब करेगी FIR

लखनऊ: फर्जी मुकदमे, झूठी गवाही और पुलिस को गलत सूचना देने वाले अब आसानी से नहीं बच सकेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस पर कार्ययोजना तैयार करना शुरू कर दिया है। डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है, जहां 60 दिनों के अंदर ऐसे मामलों को चिह्नित कर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने पर चर्चा हुई।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले की पुलिस जांच में आरोप सही न पाए जाएं, तो पुलिस केवल क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करके मुक्त नहीं हो सकती। बल्कि उसे झूठी, भ्रामक या मनगढंत सूचना देने वाले व्यक्ति के खिलाफ अनिवार्य रूप से लिखित शिकायत दाखिल करनी होगी।

दरअसल, हाईकोर्ट ने डीजीपी सहित सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अंतिम रिपोर्ट (एफआर) की स्थिति में यह प्रक्रिया हर हाल में पूरी की जाए। आदेश का पालन न करने पर इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और पीड़ित व्यक्ति सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। कोर्ट ने कहा है कि यदि जांच में पाया जाए कि सूचना देने वाले ने झूठे, भ्रामक या मनगढंत आरोप लगाए थे, तो पुलिस को अनिवार्य रूप से उसके खिलाफ लिखित शिकायत दाखिल करनी होगी। यह शिकायत संबंधित मैजिस्ट्रेट/कोर्ट में धारा 215 (1) (ए) BNSS के तहत दायर की जाएगी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआर लगाने की स्थिति में पुलिस केवल फाइनल रिपोर्ट नहीं दे सकती। उसे सेक्शन 193 BNSS के अंतर्गत अंतिम रिपोर्ट के साथ-साथ अलग से एक लिखित शिकायत भी देनी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस आदेश का पालन नहीं हुआ तो यह अवमानना माना जाएगा। पीड़ित व्यक्ति पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कंटेंप्ट की अर्जी दाखिल कर सकता है।

60 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
कोर्ट ने आदेश दिया कि पुलिस अधिकारी जांच संबंधी पूरी कार्रवाई और आवश्यक शिकायतें अधिकतम 60 दिनों में पूरी करें। यह निर्देश पुलिस अधिकारियों और मैजिस्ट्रेट स्तर पर न्यायिक अधिकारियों दोनों पर लागू है। कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया कि प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश लिखित रूप में जारी करें। इसे लेकर ही डीजीपी ने इस संबंध में बैठक बुलाई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इसमें यह सुनिश्चित हो कि हर जांच में झूठी सूचना देने वालों पर कार्रवाई की बाध्यता का पालन हो।

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
कोर्ट ने कहा कि इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (आईओ), एसएचओ, सीओ, लोक अभियोजक और फॉरवर्डिंग अथॉरिटी इनमें से कोई भी आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। यदि जांच में पाया जाए कि कोई अपराध हुआ ही नहीं, तब भी आईओ की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। ऐसे मामलों में भी झूठी शिकायत देने वालों पर कार्रवाई की प्रक्रिया आवश्यक है। कोर्ट ने 60 दिन की समयसीमा तय की है और कहा है कि आईओ, सीओ और अभियोजन अधिकारी आदेश का पालन करें, नहीं तो अवमानना की कार्रवाई होगी।