Heavy School Bag: बच्चों की सेहत और पढ़ाई से जुड़े मुद्दे अक्सर रोज़मर्रा की छोटी बातों से सामने आते हैं. इस बार महाराष्ट्र के संभाजीनगर में रहने वाले बालू गोराडे ने अपने बेटे के स्कूल बैग का वजन नापकर सोशल मीडिया पर सवाल उठा दिया. उन्होंने एक्स पर बताया कि उनका 6 साल का बेटा, जो पहली कक्षा में पढ़ता है और जिसका वजन 21 किलो है, रोज़ाना 4.5 किलो का स्कूल बैग और टिफिन लेकर जाता है.
नियमों के मुताबिक यह वजन कितना होना चाहिए?
बालू गोराडे ने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि नियमों के अनुसार बच्चे का स्कूल बैग उसके शरीर के वजन का 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इस हिसाब से उनके बेटे का बैग करीब 2 किलो के आसपास होना चाहिए था, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भारी निकली. उन्होंने बैग और टिफिन को तौल मशीन पर रखी तस्वीर भी शेयर की और पूछा कि क्या माता-पिता कभी अपने बच्चों के बैग का वजन जांचते हैं.
स्कूल से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं
पोस्ट में बालू ने यह भी बताया कि वे इस मुद्दे को कई बार स्कूल के सामने उठा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ. उनका सवाल सीधा था कि जब नियम मौजूद हैं, तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा. यही सवाल हजारों माता-पिता के दिल को छू गया और पोस्ट तेजी से वायरल हो गई. सोशल मीडिया पर कई अभिभावकों ने अपनी-अपनी कहानियां शेयर कीं. किसी ने कहा कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी के बावजूद बच्चों को रोज सभी किताबें ढोनी पड़ती हैं.किसी ने विदेशों की मिसाल देते हुए लॉकर और डिजिटल किताबों की बात की. एक महिला ने लिखा कि 40 साल पहले उनके स्कूल में भी बच्चों के लिए लॉकर की सुविधा थी, फिर आज ऐसा क्यों नहीं हो सकता.
स्कूलों पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि हर विषय के लिए 3-4 किताबें कर दी गई हैं, जिससे वजन लगातार बढ़ता जा रहा है. एक अभिभावक ने बताया कि उनकी सीनियर केजी में पढ़ने वाली बेटी को भी 6 से 8 किताबें ले जानी पड़ती हैं, जबकि स्कूल का समय सिर्फ साढ़े तीन घंटे का होता है. कुछ लोगों ने इसे बच्चों में झुके कंधों और पीठ दर्द की बड़ी वजह बताया.
क्या है स्कूल बैग पॉलिसी?
शिक्षा मंत्रालय की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के अनुसार, किसी भी छात्र का स्कूल बैग उसके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. गाइडलाइंस में कक्षा 1-2 के लिए 1.6 से 2.2 किलो, कक्षा 3-5 के लिए 1.7 से 2.5 किलो और कक्षा 9-10 के लिए अधिकतम 4.5 किलो वजन तय किया गया है. कई लोगों का मानना है कि अकेली आवाज से बदलाव मुश्किल है, लेकिन अगर माता-पिता मिलकर सवाल उठाएं तो असर पड़ सकता है. यह वायरल पोस्ट अब सिर्फ एक पिता की चिंता नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सेहत पर बड़ा सवाल बन चुकी है.