वो बीमारी, जिसमें इंसान का खुद पर नहीं रहता काबू, अपने आप चलने लगते हैं अंग

इसी साल अप्रैल की बात है. जब एक महिला अपने घर में आराम से बैठकर टीवी देख रही थी. लेकिन उसे नहीं पता था कि कुछ ही पलों में उसके साथ जो होने वाला है, वो इस दुनिया में किसी को भी हैरान कर देने के लायक है. उसका बायां हाथ उसके काबू में नहीं था. यानी उसका बायां हाथ खुद-ब-खुद उठा और उसके थप्पड़ मारने के साथ-साथ बाल खींचने लगा. जबकि उस महिला ने अपना हाथ हिलाया तक नहीं था. उसने अपने दाएं हाथ से दूसरे हाथ को पकड़ने की भी कोशिश की. लेकिन हाथे जतन धरे के धरे रह गए. 30 मिनट तक महिला असहाय होकर सब सहती रही. साल 2014 में बायलर यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की कार्यवाही में डॉक्टरों ने लिखा था कि उसके बाएं हाथ ने बिना उसकी मर्जी के उसको थप्पड़ मारे और बाल खींचे.

दिमाग की जांच से पता चला सच

जब उसके पति ने ये सब देखा तो वह तुरंत उसे अस्पताल लेकर गया. जहां स्टाफ ने तुरंत पाया कि वह अपना बायां पैर घसीट रही है. जब उसके दिमाग की जांच हुई तो सच का पता चल गया. दिमाग में एक हिस्सा होता है, जिसे parietal lobes कहते हैं. शरीर के मूवमेंट का जिम्मा दिमाग के इसी हिस्से के हाथों में होता है. इस अजीबोगरीब बीमारी को एलियन हैंड सिंड्रोम (AHS) या डॉक्टर स्ट्रेंजलव सिंड्रोम कहा जाता है. एक दिमाग की एक अजीबोगरीब स्थिति है, जहां इंसान का हाथ खुद-ब-खुद उठने लगता है, वो भी बिना उसकी मर्जी के.

डॉक्टर्स ने अपनी स्टडी में लिखा, ‘एलियन हैंड सिंड्रोम (AHS) या डॉक्टर स्ट्रेंजलव सिंड्रोम एक दिलचस्प स्थिति है, जिसमें इंसान का अपने हाथ से कंट्रोल हट जाता है और वह खुद से काम करने लगता है. ये एलियन हैंड खुद से चीजों को पकड़ लेता है और उसे छुड़ाने के लिए शख्स को दूसरे हाथ का इस्तेमाल करना पड़ता है. ज्यादा गंभीर स्थितियों में एलियन हैंड मरीजों का गला तक घोंट सकता है.

सिंड्रोम के मिले ये लक्षण!

असल जिंदगी में ऐसा होता है कि AHS से पीड़ित शख्स का हाथ खुद ही शर्ट के बटन खोल देता है, जिसे उसने अभी अभी बंद किया था, खुद से सिगरेट जला देता है और थप्पड़ भी मार देता है.

इस मामले में डॉक्टर्स को लगता है कि जब दिमाग में खून पहुंचने में दिक्कत हुई, तब यह समस्या खड़ी होने लगी. महिला की रीढ़ की हड्डी की सर्जरी होनी थी, लेकिन उससे पहले उसने ब्लड क्लॉट की दवाइयां रोक दी थीं. जबकि एलियन हैंड सिंड्रोम ब्रेन ट्रॉमा, स्ट्रोक, दौरे और न्यूरोडिजेनेरेटिक बीमारी जैसे कि अल्जाइमर के कारण हो सकता है. साल 2013 के मेडिकल रिव्यू में 150 मामलों का पता चला है.

क्या इसका कोई इलाज है?

फिलहाल AHS का कोई ठोस ट्रीटमेंट नहीं है. लेकिन व्यवहारिक रणनीति जैसे हाथ को बिजी रखना कई बार स्थिति को कंट्रोल कर लेता है. वह इसलिए क्योंकि यह बहुत ही रेयर है और इसके बारे में पता कम ही चलता है.

एलियन हैंड सिंड्रोम का पहला ज्ञात मामला 1908 में न्यूरोलॉजिस्ट कर्ट गोल्डस्टीन ने बताया था. एक सदी से भी ज्यादा समय बाद, यह अभी भी डॉक्टरों को चुनौती दे रहा है और अपने हैरान करने वाले लक्षणों से मरीजों को भयभीत कर रहा है.