UP Ganga Expressway News: भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. राज्य की अब तक की सबसे लंबी और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के सड़क परिवहन के परिदृश्य को पूरी तरह से बदलने के लिए तैयार है. यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास को भी एक नई गति प्रदान करेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि यूपी के एक्सप्रेसवे केवल सड़कें नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक भविष्य की रीढ़ हैं. इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की दिशा में यह एक्सप्रेसवे एक मील का पत्थर साबित होगा.
12 जिलों और 518 गांवों से होकर गुजरेगा गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे लगभग 594 किलोमीटर लंबा है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है. यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 जिलों और 518 गांवों से होकर गुजरेगा. इसका निर्माण 36,230 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. इस एक्सप्रेसवे पर दो मुख्य जबकि अन्य स्थानों पर 15 रैम्प टोल प्लाजा होंगे.
यह छह-लेन (जिसे आठ-लेन तक विस्तारित किया जा सकता है) का एक अत्याधुनिक एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे है, जो राज्य के 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, और प्रयागराज से होकर गुजरता है. यह राज्य के पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत बनाएगा. इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी.
इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ यात्रा के समय में होने वाली अभूतपूर्व कमी है. वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में 10 से 12 घंटे या उससे अधिक का समय लगता है. लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे के चालू हो जाने के बाद यह यात्रा केवल 6 से 7 घंटे में पूरी हो जाएगी. यह समय की बचत लोगों के जीवन और व्यावसायिक गतिविधियों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी, जिससे आवागमन और लॉजिस्टिक्स काफी आसान हो जाएंगे.
आर्थिक और औद्योगिक प्रोत्साहन
गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ एक सड़क के रूप में नहीं, बल्कि विकास के एक गलियारे के रूप में देखा जा रहा है. इसके किनारे औद्योगिक गलियारे, लॉजिस्टिक्स पार्क और कृषि-आधारित उद्योग विकसित किए जाएंगे. यह एक्सप्रेसवे उन क्षेत्रों को सीधा संपर्क प्रदान करेगा, जो पहले मुख्यधारा के परिवहन नेटवर्क से दूर थे.
औद्योगिक हब: शाहजहांपुर में एक 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी भी विकसित की जा रही है, जो आपातकालीन स्थिति में भारतीय वायु सेना के विमानों के उतरने और उड़ान भरने की सुविधा प्रदान करेगी.
रोजगार सृजन: निर्माण चरण और बाद में औद्योगिक गतिविधियों के कारण बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
कृषि लाभ: किसानों को अपनी उपज को बड़े बाजारों तक जल्दी और कुशलता से पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी.
मई में गंगा एक्सप्रेसवे पर दिखी थी वायुसेना की ताकत
शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद में गंगा एक्सप्रेसवे पर बनी एयर स्ट्रिप पर मई में भारतीय वायुसेना की ताकत देखने को मिली थी. इस पर भारतीय वायुसेना के राफेल, मिराज, जगुआर जैसे एडवांस फाइटर जेट्स ने दिन में ‘टच एंड गो’ रिहर्सल करके अपनी शक्ति और कौशल का प्रदर्शन किया था.
पूरब से पश्चिम का महामिलन: 12 जिलों, 518 गांवों से होकर गुजरेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बनेगा UP की प्रगति का महामार्ग
बता दें कि यह एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है. गंगा एक्सप्रेसवे देश और राज्य के लिए काफी अहम है. यहां से चीन की सीमा नजदीक है, इस लिहाज से इस एक्सप्रेसवे का रणनीतिक महत्व भी है. इस एक्सप्रेसवे की क्वालिटी भी काफी अच्छी है. एक्सप्रेसवे का 464 किलोमीटर का निर्माण कार्य (बदायूं से प्रयागराज तक) अदाणी ग्रुप कर रहा है. डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण मॉडल पर बने इस एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो चुका है. इसकी रियायत अवधि 30 साल होगी.
एक्सप्रेसवे राज्य के रूप में स्थापित हो रहा यूपी
गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसी अन्य परियोजनाओं के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है. यह न केवल राज्य के भीतर संपर्क को सुधारेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को पूर्वी और मध्य भारत के प्रमुख शहरों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. परियोजना में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है, जिसमें ग्रीन बेल्ट और वृक्षारोपण पर विशेष जोर दिया गया है.
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के ‘नए भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह परियोजना राज्य में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता का प्रतीक बनेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी.