नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप के मालिक और 29000 करोड़ रुपये की संपत्ति रखने वाले कारोबारी अनिल अग्रवाल को बुधवार को बड़ा सदमा लगा है। उनके बड़े बेटे अग्निवेश अमेरिका में इलाज के दौरान निधन हो गया। इसे लेकर अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पर जो पोस्ट लिखी है, वह भावुक कर देने वाली है। उन्होंने लिखा, ‘आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है। मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा। एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाए, इससे बुरा और क्या हो सकता है।’ इस तरह अनिल अग्रवाल ने अपना दर्द दुनिया के साथ साझा किया है। अनिल अग्रवाल मूल रूप से भारत के बिहार राज्य के हैं और एक सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर बड़ा साम्राज्य खड़ा किया है।
वह अकसर सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी की कहानियां शेयर करते रहे हैं। इस बीच उनके बेटे की दुखद मौत ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है। अग्निवेश अपने दोस्त के साथ अमेरिका में स्कीइंग करने गए थे। वहां हादसा हो गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। वह रिकवर ही हो रहे थे कि इसी दौरान उन्होंने कार्डिएक अरेस्ट आया और उनकी मौत हो गई। अनिल अग्रवाल अपनी यादें साझा करते हुए लिखते हैं, ‘3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है। एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में जन्मा था अग्नि। तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल आज बहुत याद आ रहा है बेटा।’
अनिल अग्रवाल बेटे के बचपन को याद करते हुए लिखते हैं, ‘अपनी मां का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था। हमेशा हंसता, हमेशा मुस्कुराता| यारों का यार था वो, और अपनी बहन Priya को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी। उसने अजमेर के मायो कॉलेज में पढ़ाई की। बेहद मजबूत व्यक्तित्व था अग्नि का और वह बॉक्सिंग चैंपियन रहा था। इसके अलावा घुड़सवारी और संगीत का भी वह शौकीन था।’ उन्होंने कहा कि मेरे बेटे फुजैरा गोल्ड जैसी कंपनी खड़ी की और हिन्दुस्तान जिंक का चेयरमैन भी बना। उन्होंने लिखा कि मेरा बेटा बेहद सादगी भरा था और वह हमेशा अपने दोस्तों और सहकर्मियों के बीच रहता था।
‘हर किसी को अपना बना लेता था मेरा बेटा, दोस्त जैसा था’
उन्होंने लिखा कि अग्निवेश जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था। वो हमेशा ज़मीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा। वो सिर्फ बेटा नहीं था – वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था। मैं और किरन टूट से गए हैं। बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया। लेकिन जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं। वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं। अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना। वो हमेशा कहता था- ‘पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?’
बेटे का सपना पूरा करूंगा, अब और सादगी से जीवन जीऊंगा
अग्रवाल कहते हैं कि हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, और सभी युवाओं को रोज़गार मिले। मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75% से ज्यादा समाज के काम में लगायेंगे। आज फिर वो वादा दोहराता हूँ। अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा। और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा। हम उन सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का दिल से धन्यवाद करते हैं जो हमेशा अग्निवेश के साथ रहे।