छत्तीसगढ़ में करोड़ों साल पुरानी गुफा की खोज, जिसके अंदर है अनोखी दुनिया !

छत्तीसगढ़ में सैलानियों के लिए एक्सलोर करने के लिए एक से बढ़कर जगह है। खासकर बस्तर में ऐसे स्थानों का भंडार है,जहां कभी संस्कृति की चमक तो कभी कुदरत के करिश्मे रोमांच से भर देते हैं। हो सकता है,आप बस्तर घूम चुके हों, लेकिन अगली बार आपको वहां कुछ नया अनुभव मिलने वाला है।

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जगदलपुर। अगर आप एक खोजी हैं और दुनियाभर के अनोखे स्थानों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आपको छत्तीसगढ़ के बस्तर का टूर प्लान करना चाहिए, क्योंकि यहां वन विभाग और वैज्ञानिकों ने एक नई गुफा की खोज की है। यह गुफा बस्तर की विश्वप्रसिद्ध कुटुमसर गुफा के भीतर मिली है ,जहां ऐसे जीव जंतु पाए गए हैं ,जो बाहरी दुनिया के जीवों से एकदम अलग हैं।

छत्तीसगढ़ में सैलानियों के लिए एक्सलोर करने के लिए एक से बढ़कर जगह है। खासकर बस्तर में ऐसे स्थानों का भंडार है,जहां कभी संस्कृति की चमक तो कभी कुदरत के करिश्मे रोमांच से भर देते हैं। हो सकता है,आप बस्तर घूम चुके हों, लेकिन अगली बार आपको वहां कुछ नया अनुभव मिलने वाला है। छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने बस्तर में 400 मीटर लंबी गुफा की खोज की है। इस गुफा की पहली तस्वीरें इतनी खूबसूरत हैं कि हर खोजी एक यहां जाना जरूर चाहेगा।

बस्तर में मिली यह गुफा इतनी खूबसूरत है, कि मानो कोई अलग दुनिया हो। मिली जानकारी के मुताबिक गुफा के भीतर पड़ताल जारी है। छत्तीसगढ़ का वन विभाग इसे जल्द ही आम पर्यटकों के लिए खोल देगा। इस गुफा को देखने के लिए आपको बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 40 किमी दूर कांगेर वैली घाटी में जाना होगा।

बस्तर की कांगेर वैली घाटी में जैव विविधताओं से भरपूर है। यहां विश्व प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा है,जिसे भारत की सबसे गहरी गुफा माना जाता है। इस गुफा की भूमि से गहराई 60 से 120 फ़ीट तक है। माना जाता है कि करोड़ों साल पहले कुटुमसर की गुफाओं में मनुष्य रहते थे। इस अंधेरी गुफा के भीतर चूना पत्थर से बनी स्टेक्टेलाइट और स्टेलेग्माईट आकृतियां है। हर साल दुनियाभर के हजारों पर्यटक इस गुफा को देखने बस्तर पहुंचते हैं,लेकिन हम जिस नई गुफा की बात कर रहे हैं,वह कुटुमसर गुफा के भीतर मिली है।यह गुफा 350 से 400 मीटर लंबी है जो कि और पुरानी गुफा से 25 फीट ऊपर है।

इस नई गुफा का तापमान कुटुमसर गुफाओं के तापमान से अलग है। गर्मी में मौसम में भी गुफा बेहद ठंडी हैं। इसमें भी कुटुमसर की तरह कैल्शियम कार्बोनेट से लाखों साल में तैयार होने वाले पत्थरों की सुंदर आकृतियां हैं, जो पर्यटकों को पसंद आने वाली हैं। मिली जानकारी के मुताबिक दंडक, कैलाश, देवगिरि और कुटुमसर सहित कुल 12 गुफाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। हाल ही में मिली यह नई गुफा किससे जुड़ी हुई है,इसकी तलाश जारी है। रेडियो कार्बन डेटिंग के माध्यम से गुफा की आयु का पता लगाया जाएगा। इस गुफा में समुद्री जीवों के अवशेष भी मिले हैं।

वन विभाग के अफसरों के मुताबिक गुफा में करोडो साल से अंधेरा है, इस कारण यहां पाए जाने वाले जीव-जन्तु बाहरी दुनिया से एकदम अलग हैं। गुफा में पाए गए मेंढ़क बाहरी दुनिया से अलग प्रजाति के हैं। गुफा में अंधी मछली पाई जाती है । गुफा के भीतर की संरचनाओं को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह करोड़ों साल पुरानी होगी। यहां करीब 110 करोड़ साल पुराने समुद्री कवक के अवशेष भी मिले हैं।